इंतजार खत्म ! हेमंत सरकार का बड़ा फैसला, 39 साल बाद 1984 सिख दंगा प्रभावितों को मिलेगा मुआवजा, जानिए पूरी खबर

    इंतजार खत्म ! हेमंत सरकार का बड़ा फैसला, 39 साल बाद 1984 सिख दंगा प्रभावितों को मिलेगा मुआवजा, जानिए पूरी खबर

    टीएनपी डेस्क(Tnp desk):-1984 के सिख दंगों को भला कौन भूल सकता है, जब देश जल गया था. तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके दो सिख सुरक्षकार्मियों ने 31 अक्टूबर की सुबह कर दी थी. इस हत्या के बाद देशभर में सिख विरोधी दंगे भड़के और इसकी आग से झारखडं भी झुलस गया. हालांकि, जो हुआ वो इंसानियत के लिए धब्बा था. दरअसल, इस दंगे के 39 साल बाद भी मुआवजे की आस में झारखंड के प्रभावित सिख परिवार नजरे लगाए हुए थे. उनकी उम्मीदें जिंदा थी कि, आज नहीं तो कल इसका मुआवजा मिलेगा. उनकी मुराद अब पूरी हो गई है. झारखंड के 41 पीड़तों को मुआवजे के भुगतान की प्रक्रिया जल्द शुरु होगी.

    करीब 2 करोड़ की राशि का होगा आवंटन

    इस सिख विरोधी दंगे के प्रभावितों के मुआवजे से जुड़े दावों की जांच के लिए गठित जस्टिस डीपी सिंह कमीशन की अनुशंसा के मुताबिक राज्य सरकार ने इसके लिए राशि जारी कर दी है. अधाकारिक सूत्रों के हवाले से ये बताया जा रहा है कि झारखंड प्रदेश के चार जिले रांची, रामगढ़,बोकारो और पलामू में सबसे ज्यादा नुकसान इस दंगे में हुआ. दंगा प्रभावितों के लिए 1 करोड़ 85 लाख 31 हजार 483 रुपए की राशि का आवंटन किया गया है.

    बोकारो में सबसे ज्यादा दंगा प्रभावित

    1984 में हुए सिख दंगे में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देशभर में सिख विरोधी दंगे हुए, झारखंड में सबसे ज्यादा प्रभावित स्टील नगरी बोकारो रहा. यहां सबसे ज्यादा 24 दंगा पीड़ित थे, जिनके बीच एक करोड़ 20 लाख रुपए मुआवजे का वितरण किया जाएगा. इसी तरह पलामू के दस पीड़ितो के बीच 17 लाख 88 हजार, रांची के छह प्रभावितों को 11 लाख 39 हजार और रामगढ़ में एक प्रभावित को 36 लाख रुपए की राशि दी जाएगी. राज्य के सरकार के गृह विभाग ने एकाउंटेट जनरल और संबंधित जिलों के डीसी को पत्र लिखकर राशि के आवंटन की जानकारी दी है.

    वन मेंबर कमीशन का हुआ था गठन

    दंगा प्रभावितों के मुआवजा के निर्धारण के लिए रिटायर्ड जस्टिस डीपी सिंह की अध्यक्षता मे वन मेंबर कमीशन का गठन किया गया था. ये झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर साल 2015 में हुआ था. कमीशन ने दंगा प्रभावितों से आवेदन मांगकर जांच की और इसके बाद सरकार को रिपोर्ट सौंप दी थी. हालांकि, इसके बावजूद दंगा प्रभावितों को भुगतान के लिए लंबे समय इंतजार करना पड़ा. करीब चार दशक तक पीड़ितों ने इंतजार किया था. इस मामले में सतनाम सिंह गंभीर नामक शख्स की ओर से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी. जिस पर इसी महीने सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने राज्य सरकार को बताने को कहा था कि दंगा पीड़ितों के मुआवजा भुगतान संबंधित जांच के लिए बनायी गई, वन मैन कमीशन की रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई की गई.


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