वर्षों से प्रचलित है मां के महास्नान की अनोखी परंपरा, जानिए विस्तार में


देवघर (DEOGHAR): नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना की कई प्रथाएं प्रचलित हैं. लेकिन देवघर के देवसंघ स्थित नवदुर्गा मंदिर में महासप्तमी के अवसर पर मां के महास्नान की अनोखी परंपरा वर्षों से प्रचलित है. देवसंघ में सप्तमी के दिन मां नवदुर्गा को महा स्नान कराया गया. खास बात यह रही की आज मां को उसी विधि विधान से स्नान कराया गया जैसा ऋषि-मुनी किया करते थे. देवसंघ के शिष्यों द्वारा देश-विदेश से लाये गये समुंद्र,महासागर,नदी का जल से मां का स्नान कराया जाता है. यह परंपरा यहां वर्षों पुरानी है, जो आज तक चली आ रही है. इतना ही नहीं यहां मां की विशेष पूजा की जाती है जो कई स्थानों से लाई गई मिट्टी से होती है. इसमें पांच महासागर,सात समुंद्र और देश की सभी पवित्र नदियों से जल ला कर मां का महास्नान कराया जाता है. इस अनोखे रस्म में शामिल होने के लिए देश के कई राज्यों से सैकड़ों की संख्या में भक्त पूजा के अवसर पर यहां पहुंचते हैं.
मूर्ति की महिमा
भक्तों के अनुसार महासप्तमी पर मां को महास्नान कराने का यह अनोखा रस्म और कहीं नहीं देखा जाता है. पूरे मंत्रोच्चारण के साथ पहले मां का दर्पण में स्नान कराया जाता है और फिर सभी महिला और पुरुष भक्तों द्वारा बारी-बारी से कतारबद्ध हो कर अपार श्रद्धा के साथ मां को महास्नान कराया जाता है. देवसंघ में रखी मां की प्रतिमा की खास बता यह है कि यहां मां की प्रतिमा को मिट्टी से प्रत्येक साल बनाया जाता है मिट्टी की प्रतिमा को जल से स्नान कराया जाता है, लेकिन इसके बाद भी मां की प्रतिमा को किसी प्रकार का क्षति नहीं होता है. यहां के भक्त इसे मां का शक्ति मानते हुए वैदिक मंत्रोचारण से पूजा करते हैं और मनवांछित फल को प्राप्त करते हैं. यही कारण है कि देश के कई राज्यों से इस दृश्य को देखने श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. महास्नान के बाद भक्तों द्वारा मां का श्रृंगार किया जाता है. मुख्य रूप से बंगाली समाज द्वारा महासप्तमी के अवसर पर मां के इस महास्नान को देखने बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी जुटते हैं.
रिपोर्ट: रितुराज सिन्हा, देवघर
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