फर्स से अर्श तक पहुंचने की कहानी, कभी मिले थे सिर्फ तीन लाख वोट अब 42 लाख मतदाता ने जताया झामुमो पर भरोसा

    फर्स से अर्श तक पहुंचने की कहानी, कभी मिले थे सिर्फ तीन लाख वोट अब 42 लाख मतदाता ने जताया झामुमो पर भरोसा

    रांची (RANCHI) :  झारखंड आंदोलन से सामने आई झारखंड मुक्ति मोर्चा सूबे की एक ऐसी पार्टी है जो फर्स से अर्श तक पहुंची है. इस पार्टी को धार देने में कई आंदोलनकारी ने बड़ी भूमिका निभाई है. झारखंडी हित में हमेशा बात उठाने वाली पार्टी अब हर झारखंडी के दिल तक पहुंच गई. जब पहली बार 1980 में विधानसभा चुनाव में झामुमो ने चुनाव लड़ा तो सिर्फ तीन लाख वोट मिले लेकिन 44 साल बाद माहौल ही बदल गया. इस बार 2024 के विधानसभा चुनाव में 43 लाख वोट मिले है.

    43 लाख वोट बताने के लिए काफी है कि झामुमो का जनाधार राज्य में कैसा है. अगर देखें तो झारखंड आंदोलन के समय शिबू सोरेन ने अन्य साथियों के साथ मिल कर झारखंड आंदोलन को धार देने के लिए एक राजनीतिक दल का गठन किया था. जिससे अलग राज्य की लड़ाई की आवाज सदन तक गूंज सके. झारखंड की मांग क्या है इसके प्रतिनिधि सर्वोच्च सदन में उठा सके. पार्टी का गठन होने के बाद हमेशा लोकसभा में हमेशा पार्टी की उपस्तिथि दर्ज हुई.

    धीरे-धीरे पार्टी का जनाधार पढ़ता गया और आखिर में अब राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बन गई. 2019 के चुनाव में पहली बार बहुमत के साथ सरकार बनाया. अगर इससे पहले देखें तो हेमंत सोरेन चौथी बार मुख्यमंत्री की पद पर शपथ लेंगे. इसे लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं के साथ झारखंड के लोगों में खुशी है. क्योंकि राज्य में अबुआ सरकार बन रही है. जो सपना गुरुजी ने देखा है उसे हेमंत सोरेन धरातल पर उतारने में लगे है. नई ऊर्जा और नए संकल्प के साथ फिर से हेमंत सत्ता में काबिज हो रहे है.

     


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