धनबाद में कांग्रेस का हाल: जिनके हार का कारण जानने पहुंचे थे नेता,वही क्यों नहीं पहुंचे बैठक में, जानिए

    धनबाद में कांग्रेस का हाल: जिनके हार का कारण जानने पहुंचे थे नेता,वही क्यों नहीं पहुंचे बैठक में, जानिए

    धनबाद(DHANBAD): एक समय था जब धनबाद में कांग्रेस के नेताओं की तूती बोलती थी. कांग्रेस नेता जहां खड़े हो जाते थे ,वहीं से लाइन शुरू होती थी. लेकिन आज कांग्रेस नेताओं को खुद किस कतार में लगे ,यह खोजना होता है. धनबाद जिले में चुनाव के दौरान भी मारपीट हुई थी.चुनाव के बाद समीक्षा बैठक में भी रविवार को मारपीट हुई.   बाहर के नेताओं के सामने धनबाद जिला कांग्रेस की नाक कटी. इन सब से आश्चर्यजनक बात यह रही की जिनकी हार क्यों हुई, इसका पता लगाने के लिए समिति धनबाद पहुंची थी. लेकिन हारने वाले ही उस बैठक से गायब थे

    कांग्रेस की हार किन कारणों से हुई यह बताने के लिए प्रत्याशी बैठक में उपस्थित नहीं हुए

    धनबाद जिले में कांग्रेस तीन विधानसभा से चुनाव लड़ रही थी. धनबाद, झरिया और बाघमारा से. धनबाद से कांग्रेस के प्रत्याशी अजय दुबे थे, तो झरिया से पूर्व विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह प्रत्याशी थी, तो बाघमारा से पूर्व मंत्री जलेश्वर महतो उम्मीदवार थे. तीनों चुनाव हार गए. तीनों सीट पर भाजपा का कब्जा हुआ. किन कारणों से यह हार हुई. यह बताने के लिए प्रत्याशी बैठक में उपस्थित नहीं हुए. यह अलग बात है कि समीक्षा बैठक के दौरान ही कांग्रेस के दो नेताओं में मारपीट हो गई. उसके बाद तो हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ. कोई मुकदमा करने जा रहा था, तो कोई उन्हें मनाने में लगा था. यह सब ड्रामा तो खूब हुआ लेकिन हार क्यों हुई, किस वजह से हुई, धनबाद में कांग्रेस की जमीन क्यों खोखली हुई है, इसका कारण समिति कितनी ढूंढ पाई, क्या रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को देगी. प्रदेश अध्यक्ष क्या रिपोर्ट केंद्र को देंगे. यह तो भविष्य की बात है. लेकिन जमीन पर जो हालात दिखे, वह कांग्रेस के प्रदेश कमेटी के लिए सुखद नहीं कहा जा सकता है.

    जानिए संयोजक शहजादा अनवर ने कहा 

    समीक्षा बैठक के बाद संयोजक शहजादा अनवर ने कहा कि जहां का चुनाव परिणाम हमारे पक्ष में नहीं रहा, वहां कार्यकर्ताओं व स्थानीय नेताओं से बातचीत कर हार की समीक्षा की जा रही है. हार के कारणों व संगठन की कमियों का पता लगाया जा रहा है. हमारा संगठन और कैसे मजबूत हो, इन सब बातों पर जोर दिया जा रहा है. धनबाद में कांग्रेस का मजबूत संगठन होने के बाद भी हम चुनाव हारे हैं .परंतु हिम्मत नहीं हारे हैं. धनबाद के सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं से राय ली गई है. उन्होंने यह भी कहा कि धनबाद झरिया और बाघमारा में हार के अलग-अलग कारण नजर आ रहे हैं. वह अपनी रिपोर्ट प्रदेश प्रभारी व अध्यक्ष को सौंपेंगे. कांग्रेस के हारे हुए प्रत्याशियों से भी लिखित रिपोर्ट मांगी गई है.

    इधर, समीक्षा समिति के सदस्य बलजीत सिंह बेदी ने धनबाद झरिया और बाघमारा के हारे हुए प्रत्याशियों के नहीं पहुंचने पर नाराजगी जाहिर की. कहा कि जिनके लिए बैठक आयोजित की गई. वहीं बैठक में नहीं पहुंचे. यह ठीक नहीं है. टिकट मांगते समय प्रत्याशियों के पास पूरा समय होता है. वह पहले संगठन को दरकिनार करते हैं. फिर आरोप लगाते हैं कि संगठन से मदद नहीं मिली. बता दे कि कांग्रेस एस सी सेल के प्रदेश कोऑर्डिनेटर पिंटू तुरी व झरिया प्रखंड कांग्रेस के अध्यक्ष इम्तियाज के बीच किसी बात को लेकर मारपीट हो गई. हालांकि बाद में वरीय नेताओं के समझाने बुझाने के बाद मामला थोड़ा शांत हुआ. बात इतनी बढ़ गई थी कि मारपीट की लिखित शिकायत थाना में करने की बात होने लगी थी. उसके बाद मामला बिगड़ता देख  नेताओं ने हस्तक्षेप कर दोनों के बीच सुलह कराया.

    यह अलग बात है कि चुनाव के दौरान भी कांग्रेस के दो नेताओं में हुई मारपीट के मामले में भी कार्रवाई के बजाय सुलह कराने पर कांग्रेस का जोर रहा. इसके लिए कांग्रेस के वरीय नेता अधीर रंजन चौधरी को कड़ी मेहनत करनी पड़ी. जो भी हो लेकिन धनबाद में कांग्रेस की जमीन एक समय मजबूत थी. वह जमीन कहां खो गई. इसका पता लगाने की कोशिश कितनी ईमानदारी से हो रही है या की जाएगी. यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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