मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से ईडी ने जिस भवन में पूछताछ की, वह मकान कभी पूर्व मंत्री एनोस एक्का का हुआ करता था,जानिए फिर कैसे खुल गया ईडी कार्यालय

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से ईडी ने जिस भवन में पूछताछ की, वह मकान कभी पूर्व मंत्री एनोस एक्का का हुआ करता था,जानिए फिर कैसे खुल गया ईडी कार्यालय

    धनबाद(DHANBAD): झारखंड की राजधानी रांची का माहौल गुरुवार को अलग था. तरह-तरह की बातें हो रही थी. ईडी कार्यालय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछताछ हो रही थी. पूछताछ होने के बाद गुरुवार की रात 9:40 पर मुख्यमंत्री ईडी कार्यालय से बाहर निकले. आज जो ईडी कार्यालय है, वह 2009 में झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का का हुआ करता था. मंत्री बनने के बाद उन्होंने एयरपोर्ट रोड में इस आलीशान भवन को बनवाया था. उसके बाद एनोस एक्का आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई के आरोपी बन गए. सीबीआई के चार्जशीट के आधार पर उनके खिलाफ ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया. साल 2018 में प्रवर्तन निदेशालय ने इस बंगले को कानूनी रूप से जब्त कर लिया. सितंबर 2021 से ईडी ने अपना जोनल कार्यालय खोल दिया. इसके बाद यही से लगातार कामकाज कर रही है. प्रवर्तन निदेशालय के आंकड़ों पर भरोसा करें तो इस भवन की कीमत दो करोड़ से अधिक है. यही नहीं, गुरुवार को जिस भवन में मुख्यमंत्री से पूछताछ हो रही थी, उसी भवन में मुख्यमंत्री के पिता हेमंत सोरेन को हराने का ताना-बाना बुना गया था. मधु कोड़ा सरकार के पतन के बाद शिबू सोरेन जब राज्य के मुख्यमंत्री बने, तब उनकी सरकार में कैबिनेट मंत्री थे एनोस एक्का.लेकिन तमाड़ के उपचुनाव में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के खिलाफ झारखंड पार्टी के टिकट पर राजा पीटर को चुनाव में उतार दिया. राजा पीटर से शिबू सोरेन चुनाव हार गए. विधायक रमेश सिंह मुंडा की हत्या के बाद खाली हुई तमाड़ सीट पर उपचुनाव हुआ था. इस उपचुनाव में शिबू सोरेन और राजा पीटर आमने-सामने थे. शिबू सोरेन चुनाव हार गए और इस वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा .उस समय वह लोकसभा के सदस्य थे. वहीं, गुरुवार को मुख्यमंत्री से पूछताछ को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के अलग-अलग बोल हैं. शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो का कहना है कि भाजपा अपनी आदत से लाचार है. राज्य की सरकार को अस्त-व्यस्त करने के लिए यह कृत्य किया जा रहा है. भाजपा झारखंड विरोधी है . राज्य की जनता परेशान नहीं है बल्कि भाजपा के लोग सिर्फ परेशान हैं. वहीं, दूसरी ओर इस मामले में बाबूलाल मरांडी का कहना है कि झूठ बोलने के लिए भी अक्ल चाहिए, सवाल रॉयल्टी चोरी का नहीं ,झारखंड के अकेले साहिबगंज जिले के जंगल ,पहाड़ों से एक हजार करोड़ रुपए मूल्य के पत्थर चुराकर बेच देने का है. दूसरे जिलों में अवैध पत्थर खनन एवं बालू, कोयला चोरी करवाने की कमाई का मामला तो इससे अलग है. आपको बता दें कि कई लोगों पर कार्रवाई करने के बाद ईडी ने मुख्यमंत्री को समन किया है. 6 मई को ईडी ने मनरेगा घोटाले में राज्य की तत्कालीन खान सचिव पूजा सिंघल व उनके सहयोगियों के ठिकाने पर छापेमारी की थी. इस दौरान 19 करोड़ से अधिक राशि जब्त की गई थी. जांच के बाद ईडी ने बताया था कि जब्त पैसों में अधिकांश राज्य के बड़े पॉलीटिशियन और नौकरशाहों के हैं. इसके बाद 8 जुलाई को ईडी ने अवैध खनन के मामले में मुख्यमंत्री के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा व उनके सहयोगियों के ठिकाने पर छापेमारी की. इस मामले में ईडी ने 19 जुलाई को पंकज मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया. फिर 25 अगस्त को प्रेम प्रकाश, सीए जयपुरिया के ठिकानों पर छापेमारी हुई .प्रेम प्रकाश के यहां से सीएम हाउस में तैनात दो सिपाहियों की एके-47 राइफल ,कारतूस बरामद हुए थे. जयपुरियार के यहां से भी कुछ कागजात मिले थे.

    रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह, धनबाद 


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