गुमला(GUMLA): प्रकृति की सुंदर वादियों के बीच पहाड़ों पर मौजूद ऐतिहासिक प्रसिद्ध बाबा टांगीनाथ धाम का मंदिर आज लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है. इस स्थल पर न केवल गुमला वासी बल्कि विभिन्न इलाकों के साथ-साथ बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ से हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं और यहां के माहौल में पूरी तरह से लिन हो जाते हैं.
टांगीनाथ धाम का इतिहास
टांगीनाथ धाम गुमला जिले के दुमरी प्रखंड में स्थित एक प्राचीन और ऐतिहासिक तीर्थस्थल है. यह स्थान भगवान शिव की उपासना के लिए प्रसिद्ध है और इसके ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक महत्व हैं. टांगीनाथ धाम की महत्ता इसकी रहस्यमयी मूर्तियों, शिलालेखों और ऐतिहासिक धरोहरों के कारण और भी बढ़ जाती है.
भगवान परशुराम ने स्थापित की थी टांगी
टांगीनाथ धाम का इतिहास पौराणिक काल से जुड़ा हुआ है. ऐसा माना जाता है कि यहां भगवान परशुराम ने अपनी टांगी (फरसा) को स्थापित किया था, जिसके कारण इस स्थान का नाम तांगीनाथ पड़ा. यह स्थल प्राचीन गुप्त और नागर शैली की मंदिर निर्माण कला को दर्शाता है.
यहां कई प्राचीन शिवलिंग स्थापित हैं, जो प्रमाणित करते हैं कि यह स्थल प्राचीन काल से ही एक महत्वपूर्ण शिव उपासना केंद्र रहा है. यहां पर कई शिलालेख और प्रस्तर मूर्तियां भी पाई गई हैं, जिन पर संस्कृत में लेख अंकित हैं. ये शिलालेख और मूर्तियां इस स्थान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाते हैं.
शिव पर्वों पर यहां होती है विशेष पूजा-अर्चना
टांगीनाथ धाम को एक सिद्धपीठ माना जाता है. यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. महाशिवरात्रि और अन्य शिव पर्वों पर यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, जिसमें दूर-दूर से भक्त आते हैं. यह धाम घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसा हुआ है, जो इसे एक दिव्य और शांत वातावरण प्रदान करता है. यहां का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है.
टांगीनाथ धाम एक ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर है. इसकी पुरातात्विक संरचनाएं और धार्मिक मान्यताएं इसे एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल बनाती है. यदि आप झारखंड के इतिहास, धर्म और संस्कृति को करीब से जानना चाहते हैं, तो तांगीनाथ धाम की यात्रा अवश्य करें. झारखंड सरकार की ओर से भी अब इस स्थल के विकास को लेकर विशेष रूप से प्रयास करता हुआ देखा जा सकता है. पूर्व में इस मंदिर की जो स्थिति थी उसे बेहतर करने की दिशा में लगातार झारखंड सरकार की ओर से प्रयास किया जा रहा है.
रिपोर्ट: सुशील कुमार सिंह
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