सरफराज अहमद का कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा ! आखिर राज्यसभा चुनाव से पहले कौन फैला रहा रायता!

    सरफराज अहमद का कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा ! आखिर राज्यसभा चुनाव से पहले कौन फैला रहा रायता!

    टीएनपी डेस्क (Tnp desk):- सियासत में कुर्बानियां भी अपने फायदे और गुणा-गणित करके ही सियासतदांन करते हैं. इसका इतिहास और भूगोल तो यही बतलाता है. सत्ता का नशा ही कुछ ऐसा होता है . हेमंत सोरेन की जमीन घोटाले मे गिरफ्तारी के बाद चंपई सोरेन की सरकार तो आ गई, इससे महागठबंधन की एकता में कोई फर्क नहीं पड़ा. लेकिन, याद कीजिए इस साल की पहली तारीख और वो सुबह जब जेएमएम से विधायक सरफराज अहमद ने गांडेय सीट से इस्तीफा दे दिया. आखिर उनका मकसद क्या था ?. आखिर ऐसा क्यों किया ? चर्चा तो उस वक्त से ही तेज थी कि सरफराज राज्यसभा में जायेंगे और उनकी सीट से हेमंत सोरेन की वाइफ कल्पना चुनाव लड़ेगी, क्योकि कल्पना के मुख्यमंत्री बनने की बात खूब हो रही थी. हालांकि, ऐसा कुछ नहीं हुआ. सवाल ये है कि सरफराज अहमद ने तो विधायकी से इस्तीफा दे दिया. लेकिन, वे राज्यसभा जायेंगे या नहीं अभी इसे लेकर चर्चा तेज है.

    दो राज्यसभा सीट के लिए मतदान 

    दरअसल, 21 मार्च को झारखंड विधनसभा राज्यसभा के लिए मतदान होगें और इसके नामांकन की आखिरी तारीख 11 मार्च है. लिहाजा, बैचेनी तो बढ़ेगी ही , क्योंकि सरफराज अहमद के उम्मीदवार बनाने का शौर बहुत है. दरअसल, जिन दो सीट खाली हो रही है कि उनमे से एक कांग्रेस कोट के धीरज साहू की भी हैं, जी हां ये वही धीरज है, जिनके घर सो साढ़े तीन सौ करोड़ रुपए आईटी रेड में मिले थे , जबकि, दूसरे भाजपा के समीर उरांव हैं 
    कांग्रेस इस बार कैश कांड में नाम आने के बाद शायद धीरज साहू को फिर मौका दे, लेकिन, उसकी चाहत ये जरुर होगी की उसका ही अपना कोई उम्मीदवार हो. इधर, झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए पेंच ये फंसा हुआ है कि, राज्य में सरकार बनने के बाद दो जेएमएम उम्मीदवार राज्यसभा जा चुके हैं. 2020 में शिबू सोरेन और 2022 में महुआ माजी राज्यसभा गई थी. ऐसे में सरफराज अहमद को भेजना आसान नहीं होगा, क्योंकि इसमे स्वाभाविक दावा कांग्रेस का बनता है. हालांकि, गठबंधन में किसी तरह की गांठ न आए इसका ख्याल तो जेएमएम और कांग्रेस दोनों रख रही है. एक चर्चा तो यह भी फिंजा में उड़ी हुई है कि सरफराज अहमद को कांग्रेस में शामिल कराकर राज्यसभा भेजा जा सकता है. हालांकि, ये हवा कितनी हकीकत में बदलती है. ये तो वक्त बतायेगा. वैसे सरफराज अहमद लंबे समय तक कांग्रेस में रहें हैं. इसके बाद जेएमएम में आए थे.  

    कांग्रेस की मुश्किल 

    कांग्रेस के लिए दूसरा पहलू ये  भी है कि आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए, किसी भी  सूरत में कोई खतरा मोलना नहीं चाहती है. क्योंकि , अभी सीट बंटवारे पर बात फाइनल नहीं हुई है . इस बार तो जेएमएम के साथ उसकी रस्साकशी भी सीट शेयरींग को लेकर तेज है. अभी इस पर भी फैसला लिया जाना है कि राज्य की 14 लोकसभा  सीट में कितनी-कितनी सीट पर सहमति कांग्रेस और जेएमएम की बनती है. इन सभी चिजों को  देखते हुए राज्यसभा चुनाव में किसी भी तरह का मनमुटाव और उतावलापन कांग्रेस नहीं दिखना चाहेगी. उसकी कोशिश होगी कि सारी चिजे शांति पूर्वक समाधान हो जाए. झारखंड कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश ठाकुर भी पहले कह चुके है कि इस लेकर जल्द ही निर्णय सभी की सहमति से ही लिया जाएगा. 

    नंबर गेम में जेएमएम आगे 

    मौजूदा वक्त में कांग्रेस का दावा राज्यसभा सीट के लिए बन रही है. लेकिन, गठबंधन धर्म के नाते शायद कुछ त्याग करे. लेकिन, जहां तक बात नंबर गेम की है, तो जेएमएम इसमे आगे है. क्योंकि , झारखंड विधानसभा में जेएमएम की 29 सीट है, जबकि, 17 सीट कांग्रेस है. वही, राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 वोटों की जरुरत होगी. ऐसा मे बगैर झारखंड मुक्ति मोर्चा के सहयोग से कांग्रेस का उम्मीदवार भी राज्यसभा नहीं पहुंच सकेगा. 
    देखना यही दिलचस्प होगा कि सरफराज अहमद जेएमएम-कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार होते है या नहीं. क्योंकि, उन्होंने  पार्टी के कहने पर ही इस्तीफा दिया. अगर इसके बदले उन्हें इनाम नहीं मिलेगा, तो शायद फिर पार्टी के भीतर भी एक अच्छा संदेश नहीं पहुंचेगा. 
    हालांकि, इसकी तस्वीर कुछ दिनों में ही साफ हो जाएगी कि आखिर कौन उम्मीदवार जेएमएम और कांग्रेस की तरफ से राज्यसभा का होगा .


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