ऑनलाइन खरीदारी से दुकानदार चिंतित, बताया कि कैसे अब परिवार चलाना हो रहा है मुश्किल, जानिए  

    ऑनलाइन खरीदारी से दुकानदार चिंतित, बताया कि कैसे अब परिवार चलाना हो रहा है मुश्किल, जानिए  

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : पलामू जिला में धनतेरस का बाज़ार सज गया है. एलेक्ट्रॉनिक्स,बर्तन,सोना चांदी के अलवा लक्ष्मी गणेश की मूर्तियों से बाज़ार चहक रहा है. हुसैनाबाद व हैदरनगर के बाज़ार की रौनक बढ गई है. दुकानदारों ने एक से बढ़कर एक समान की प्रदर्शनी लगाई गई है. खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ लगी है. मगर ये भीड़ पहले की तरह नही है ऐसा इसलिए क्योंकि अब जमाना डिजिटल हो गया है. लोग घर बैठे-बैठे अनलाइन खरीदारी करना ज्यादा पसंद करते है. ऐसे में ऑनलाइन खरीदारी ने दुकानदारों के साथ साथ बाजार की रौनक धीरे धीरे कम हो रही है. 

    परिवार का खर्च चलाना मुश्किल

    कई दुकानदारों का कहना है कि पहले से ही बाजार में मंदी का दौर चल रहा है. ऊपर से आम लोगों में ऑनलाइन खरीदारी का रुझान बढ़ा है. छोटे बाजारों के दुकानदारों के समक्ष बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है. ऑनलाइन खरीदारी  ने दुकानदारों की कमर तोड़ दी है. दुकान का किराया, स्टाफ का पेमेंट के अलावा जीएसटी का खर्च दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है. बावजूद इसके ऑनलाइन व्यवपार से छोटे दुकानदारों की बिक्री व आमदनी घट रही है. परिणाम स्वरूप खुद और परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है. 

    आमदनी में काफी गिरावट 

    इस धनतेरस पर व्यवसाय को लेकर संशय की स्थिति है. अकाल सुखाड़ की वजह दो वर्ष से धंधा मंदा है. धनतेरस को लेकर उम्मीद जगी है, मगर जिस तेजी के साथ ऑनलाइन व्यवपार बढ़ रहा है. उससे उम्मीद पर पानी फिरता दिख रहा है. स्तिथि ऐसी है कि लोग रोजमर्रा की जरूरत का सामान भी ऑनलाइन खरीदने में दिलचस्पी रख रहे हैं. धनतेरस पर भी इसका असर साफ दिखने लगा है. बता दें कि हुसैनाबाद हैदरनगर में धनतेरस पर करीब तीन से चार करोड़ का व्यवसाय होता था. दो वर्षो में इसने काफी गिरावट आई है.  एक एक दुकानदार 20 से 40 लाख का व्यवसाय कर लिया करते थे. अब दस लाख का भी व्यवसाय मुश्किल हो गया है. 

    आभूषणों की बिक्री भी घटी

    मिट्टी का दिया बेचने वाले लोगों की भी स्तिथि कुछ खास नही है. अब उनके दिए सिर्फ पूजा के लिए लोग खरीदते हैं. दिए की जगह विभिन्न तरह की इलेक्ट्रोनिक लाइटों ने ले लिया है.  दियों के लिए कपास की रुई बेचने का काम मुस्लिम परिवार करते आए हैं। दीपावली के दिए में रोशनी की व्यवस्था के लिए रुआ जरूरी होता है, जो सदियों से सांप्रदायिक सौहार्द्र का प्रतीक है. वहीं बढ़ती मंहगाई में आभूषणों की बिक्री पर काफी असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि लोगों की आमदनी के मुकाबले खर्च बढ़ने की वजह से आभूषणों की बिक्री घटी है.


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