सरायकेला : इधर थाना कर्मियों को पुलिसिंग का पाठ पढ़ा रहे थे एसपी, दूसरी तरफ एनजीटी की रोक के बाद भी धड़ल्ले से हो रहा था अवैध बालू का कारोबार!

    सरायकेला :  इधर थाना कर्मियों को पुलिसिंग का पाठ पढ़ा रहे थे एसपी, दूसरी तरफ एनजीटी की रोक के बाद भी धड़ल्ले से हो रहा था अवैध बालू का कारोबार!

    सरायकेला : झारखंड के सरायकेला जिले में एक ओर अवैध उत्खनन और अवैध बालू के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन सख्ती बरतने का दावा कर रही है. वहीं, दूसरी ओर प्रशासन के सख्त पहरे के बीच पहले रात के अंधेरों में सजने वाला बालू का काला बाजार अब बेखौफ दिन में भी सजने लगा है. बालू माफिया दिन के उजाले में भी दिनदहाड़े मानिकुई नदी से ट्रैक्टरों से अवैध रूप से बालू निकासी कर काली कमाई करने में लगे हुए हैं. इन्हें न तो प्रशासन की सख्ती की परवाह है और न ही इन्हें कोई रोकने टोकने वाला. प्रतिदिन दर्जनों बालू लदे हाईवा को मुख्य मार्गों से होकर गुजरते आसानी से देखा जा सकता है. कांड्रा-चौका मार्ग पर स्थित गिद्दीबेड़ा टोल प्लाजा व कांड्रा मोड़ स्थित टोल प्लाजा में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखकर सत्यता की जांच की जा सकती है. हालांकि पहले जहां ट्रैक्टर मालिकों ने प्रशासन के भय से कारोबार बंद कर दिया था तो वहीं अब बड़ी गाड़ियों के परिचालन को देखते हुए उनके मन से भी खौफ खत्म होता जा रहा है. 

    अवैध बालू की ढुलाई में लगे ज्यादातर हाइवा के पीछे नंबर प्लेट नहीं

    नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा जारी रोक के बावजूद दिन के उजाले में भी नदियों से बालू का उठाव हो रहा है. वहीं, बालू की किल्लत ने बालू माफियाओं के लिए आपदा को अवसर में बदल दिया है. बालू की इन ऊंची कीमतों से भले ही राज्य सरकार के राजस्व में इजाफा नहीं हो रहा हो, लेकिन बालू माफिया और प्रशासनिक अधिकारी चांदी काट रहे हैं. ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी खनन विभाग या जिला प्रशासन को नहीं है, बल्कि लोग दबी जुबान से सब कुछ सेटिंग के आधार पर संचालित होने की चर्चा कर रहे हैं. कांड्रा टोल प्लाजा से पार हो रहे हाइवा संख्या JH 05BX 2411 के ड्राइवर से जब पूछा गया कि हाइवा में कितना सीएफटी बालू है तो ड्राईवर ने 550 सीएफटी बालू होने की बात कही व चालान भी होने की बात कही.  लेकिन उसके पास जो चालान था उसमे 400 सीएफटी व समयानुसार लैप्स चालान था. जिससे साफ जाहिर होता है कि एक चालान लेकर कई ट्रीप चलाया जा रहा है और चालान की मात्रा से अधिक लोड लेकर चल रहा है. और तो और जितने भी हाइवा अवैध बालू की ढुलाई में लगे हैं, लगभग सभी में पीछे नंबर प्लेट नहीं लगा रहता है. 

    दिनभर मानीकुई घाट से हो रहा अवैध बालू का खनन

    इस संबंध में जब खनन पदाधिकारी को बताया गया तो उन्होंने स्थानीय थाना प्रभारी को सूचित करने की बात कही. वहीं, बुधवार को जिले के नए एसपी मुकेश कुमार लुणायत कांड्रा थाने में थाना कर्मियों को पुलिसिंग का पाठ पढ़ा रहे थे तो दूसरी ओर बालू माफियाओं के अवैध बालू लदे हाइवा कांड्रा थाना के सामने से बिना रोक टोक परिवहन में जुटे रहे. दिनभर मानीकुई घाट से अवैध बालू का खनन होता रहा. ऐसे में लोगों के जेहन में कई सवाल कौंधते रहे. वैसे जिले की फिजाओं में नए एसपी के इमानदारी का नैरेटिव बनाया जा रहा है, मगर जिले के सड़कों पर धड़ल्ले से गुजरते अवैध बालू के खनन और परिवहन को देखकर कहानी कुछ और ही बयां कर रही है. बहरहाल उम्मीद है कि इन तस्वीरों और बालू के अवैध गोरखधंधे को देखकर संभवतः खनन विभाग और पुलिस- प्रशासन हरकत में आएगी और बालू के इस गोरखधंधे पर लगाम लगाएगी.


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