मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे गुमला के इस गांव के लोग, जिम्मेदार नहीं ले रहे सुध, बदहाली की जीवन जी रहे ग्रामीण

    मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे गुमला के इस गांव के लोग, जिम्मेदार नहीं ले रहे सुध, बदहाली की जीवन जी रहे ग्रामीण

    गुमला(GUMLA): गुमला जिले के सिसई प्रखंड क्षेत्र के नगर पंचायत स्थित कपिलनाथ चट्टाईन टोली गांव के ग्रामीण गांव की दुर्दशा से काफी आक्रोशित है. ग्रामीणों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव में ऐसे प्रतिनिधि को चुनना चाहेंगे,जो उनकी समस्या को समझे और उसका समाधान निकाले.

    बरसात मे अन्य गांव से नहीं रहता संपर्क

    कपिलनाथ चट्टाईन टोली गांव के ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के इतने दिनों के बाद भी गांव से मुख्य पथ तक पहुंचने के लिए सड़क और पुल पुलिया नहीं है. जिस कारण बरसात के दिनों में गांव अन्य भागों से कट जाता है. बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं. यही नहीं अगर किसी की तबीयत खराब हो जाए तो उसे इलाज के लिए गांव में इलाज के व्यवस्था नहीं है और बरसात के दिनों में इलाज के लिए गांव से बाहर टोकरी में डालकर ले जाना पड़ता है. ग्रामीणों ने बताया कि आजादी के इतने लंबे समय के बाद भी गांव बहुत बुरी स्थिति में है.अभी भी गांव में सड़क,पीने का पानी, स्कूल,आंगनबाड़ी, अस्पताल जैसी सुविधा उपलब्ध नहीं है. ग्रामीण ऐसे ही जीवन जी रहे हैं जैसे 40-50 वर्ष पहले हुआ करता था ग्रामीणों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव में ऐसे ही प्रतिनिधि को चुनेंगे जो उनके लिए काम करें. चुनाव के समय सभी पार्टियां प्रचार के लिए तो आते हैं लेकिन चुनाव के बाद कोई नहीं आता है.

    विधायक भी नहीं आते देखने

    किसी भी गांव की इस तरह की बदहाल तस्वीर इस बात की ओर इशारा करती है कि जिला प्रशासन के साथ ही साथ इलाके से चुनकर जाने वाले जन प्रतिनिधि भी गांव के विकास को लेकर गंभीर नहीं है यही कारण है कि आज की योग में भी इस तरह की बादल गांव की तस्वीर देखने को मिलती है. इसी प्रखंड के जिस गांव की यह तस्वीर है उसे गांव के विधायक अपने आप को काफी विकास करने वाले विधायकों के रूप में समाज के सामने रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा जो परिस्थितियां है वह स्पष्ट बता रही है कि विधायक ने अपने क्षेत्र के विकास को लेकर कुछ खास नहीं किया है. यही कारण है कि लोग आज भी बदहाली में जीवन जी रहे हैं. लोगों के साथ समस्याओं के अंबार लगी हुई है. जब लोगों को बीमार पड़ने के बाद खाट में ढोकर ले जाया जाता है, तो ऐसे में आप समझ सकते हैं कि आखिरकार उसे इलाके में सुविधा कैसी है.  

    प्रशासनिक पदाधिकारी नहीं ले रहे सुध

    पूरे मामले पर कोई भी जन प्रतिनिधि या जिला का प्रशासनिक पदाधिकारी कुछ नहीं बोलना चाहता है, क्योंकि किसी को अपने जिम्मेदारी के एहसास नहीं है. सारे लोगों का स्पष्ट करना है कि अब गांवों में विकास हो रहा है और इस गांव तक भी विकास की गाड़ी पहुंच जाएगी, लेकिन वह विकास की गाड़ी कब पहुंचेगी इसका अंदाजा और समय की पाबंदी पर कोई बात नहीं करता है.

    रिपोर्ट-सुशील कुमार सिंह 


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