पढ़िए- जून का महीना आते ही क्यों सिहर उठती है भारत की राजनीति 

    पढ़िए- जून का महीना आते ही क्यों सिहर उठती है भारत की राजनीति 

    धनबाद(DHANBAD): भारत की राजनीति में जून का महीना इतिहास में तो पहले से ही दर्ज है. लेकिन 2024 का जून महीना भी इतिहास के पन्नों में निश्चित रूप से अंकित होगा. 10 साल पूर्ण बहुमत से सरकार चलाने वाली भाजपा को 4 जून को आए चुनाव परिणाम में अकेले बहुमत नहीं मिला. भाजपा 240 सीटों पर सिमट गई. यह  अलग बात है कि एनडीए  को  बहुमत मिला और सरकार बन गई. नरेंद्र मोदी तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने है. भाजपा की ओर से जिस योजना के तहत चुनाव प्रचार किया गया, 400 पार  का नारा दिया गया, वह सफल  नहीं हुआ. विपक्षी दलों ने एक होकर चुनाव लड़ा और उत्तर प्रदेश में भाजपा को करारी हार मिली. बिहार और झारखंड में तो प्रतिष्ठा बच गई फिर बंगाल में भाजपा की  उम्मीद पर पानी फिर गया. अगर इतिहास के पन्नों को खोला जाए तो यही जून का महीना है, जिस महीने में 1975 में देश में आपातकाल की घोषणा हुई थी. 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगाया गया था. उसके बाद तो जयप्रकाश नारायण, चंद्रशेखर समेत देश के कई बड़े नेता 25 जून 1975 के पौ  फटने से पहले ही गिरफ्तार कर लिए गए थे. फिर विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी का ऐसा  सिलसिला चला कि  जेल में जगह कम पड़ने लगी. 

    जून में ही आया था इंदिरा गाँधी के खिलाफ कोर्ट का फैसला 
     
    वैसे, तो इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में संपूर्ण क्रांति की शुरुआत 1974 में ही हो गई थी. लेकिन 1975 के जून महीने में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द करने का फैसला दिया. यह  फैसला समाजवादी नेता राजनारायण  की याचिका पर हुआ था. 1971 में इंदिरा गांधी रायबरेली से चुनाव जीत गई थी. उनके प्रतिद्वंद्वी थे समाजवादी नेता राजनारायण. हारने के बाद राज नारायण ने याचिका दायर की थी और आरोप लगाया था  कि सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर इंदिरा गांधी ने चुनाव जीता है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 जून 1975 को इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द करने का फैसला सुनाया. इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला आते ही कांग्रेस नेताओं की बेचैनी बढ़ गई. अगले कदम पर विचार किया जाने लगा. इमरजेंसी के बाद चुनाव हुए, उस चुनाव में रायबरेली सीट से इंदिरा गांधी चुनाव हार गई और राज नारायण विजय घोषित किए गए. हालांकि इस चुनाव परिणाम को इंदिरा गांधी ने सिर  आंखों पर लिया और उसके बाद फिर हुए चुनाव में इंदिरा गांधी रायबरेली से चुनाव जीत गई. लेकिन देश में आपातकाल की पीड़ा को याद कर आज भी लोग सिहर  उठते है. यह  अलग बात है कि आपातकाल के समय  देश ने एक अलग अनुभव किया था. ट्रेन  समय पर चल रही थी, अधिकारी समय पर दफ्तर जा रहे थे.

    देश में आपातकाल  जून महीने में ही लगा था 

    जो भी हो, लेकिन जून का महीना आते ही भारतीय राजनीति सिहर उठती है. देश में आपातकाल भी जून महीने में ही लगा था और जून महीने में ही 2024 का चुनाव परिणाम आया. जिसमें भाजपा को अकेले दम पर बहुमत नहीं मिली. भाजपा को गठबंधन की सरकार बनानी पड़ी. यह बात भी सच है कि कुछ घटनाएं ऐसी होती है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता. जून महीने का ही  ऑपरेशन ब्लू स्टार भी ऐसी ही एक घटना थी. पहली  जून 1984 को यह ऑपरेशन हुआ था. आदेश मिलने के बाद पहली  जून को ही  फुल एक्शन में सेना आ गई थी. उसने स्वर्ण मंदिर की घेराबंदी शुरू कर दी. इसी दौरान सुरक्षा बलों और उग्रवादियों के बीच जमकर गोलीबारी हुई. 10 जून तक चले ऑपरेशन में बहुत खून खराबा हुआ था. ऑपरेशन के दौरान जान माल  का  भारी नुकसान हुआ था. यही ब्लू स्टार इंदिरा गांधी की हत्या का कारण बना. इस ऑपरेशन के चार महीने बाद 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की उनके दो सिख बॉडीगार्डों ने हत्या कर दी. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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