दुमका: आदिवासी हॉस्टल छोड़ने को क्यों विवश हुए जूनियर छात्र- जानिये पूरा मामला

    दुमका: आदिवासी हॉस्टल छोड़ने को क्यों विवश हुए जूनियर छात्र- जानिये पूरा मामला

    दुमका(DUMKA): दुमका के आदिवासी कल्याण छात्रावास संख्या 5 में रैगिंग का मामला सामने आया है. वैसे तो रैगिंग पर सरकार की तरफ से प्रतिबंध है, लेकिन समय-समय पर विभिन्न शिक्षण संस्थानों में रैगिंग का मामला समाचार पत्रों की सुर्खियां बनता रहा है. उसकी एक बानगी दुमका में भी देखने को मिली. घटना 22 और 23 जून की रात की है, लेकिन आज पीड़ित छात्रों ने नगर थाना पहुंचकर थाना प्रभारी को आवेदन देकर न्याय के साथ-साथ जानमाल की सुरक्षा की गुहार लगाई है.

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    ये है मामला

    पीड़ित छात्रों का आरोप है कि 22 जून की रात 11 बजे से सुबह 3:00 बजे तक 40 से 50 जूनियर छात्रों के साथ मारपीट की गई. सीनियर छात्रों ने पहले सभी जूनियर छात्रों को एक कमरे में बंद कर दिया. फिर चार-चार की संख्या में जूनियर छात्रों को दूसरे कमरे में ले जाकर सीनियर छात्रों ने लाइट ऑफ कर पहले बेरहमी से पीटा. लाइट ऑन कर निर्वस्त्र किया गया और उसके बाद भी पिटाई की गई. चार छात्रों की एक साथ पिटाई के बाद फिर उन चारों पीड़ित छात्रों को दूसरे कमरे में बंद किया गया और उसके बाद फिर अन्य चार छात्रों को कमरे में लाकर उसी तरीके से सुबह 3:00 बजे तक पिटाई की जाती रही.

    हॉस्टल छोड़ने पर मजबूर जूनियर छात्र

    जूनियर छात्र सीनियर के इस रवैये से काफी दहशत में आ गए. उन्होंने अपने परिवार वालों से संपर्क साधा तो परिवार वालों ने हॉस्टल या पढ़ाई छोड़ने के साथ-साथ थाना में आवेदन देकर न्याय की मांग की बात कही. तब छात्रों ने आज थाना पहुंचकर थाना प्रभारी को आवेदन दिया है. इस बाबत नगर थाना प्रभारी नीतीश कुमार का कहना है कि छात्रों द्वारा रैगिंग से संबंधित एक आवेदन प्राप्त हुआ है. वरीय अधिकारियों के दिशा निर्देश के आलोक में मामले की जांच की जा रही है. जांच में दोषी पाए जाने पर दोषी छात्रों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

    रिपोर्ट: पंचम झा, दुमका  


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