झामुमो के बैनर पर सियासी घमासान: बैनर में गुरूजी, हेमंत और बसंत का नाम, लेकिन कल्पना व गठबंधन को नहीं मिली जगह

    झामुमो के बैनर पर सियासी घमासान: बैनर में गुरूजी, हेमंत और बसंत का नाम, लेकिन कल्पना व गठबंधन को नहीं मिली जगह

    रांची(RANCHI): राजधानी रांची के चौक चौराहा में एक बार फिर से बैनर का स्टंट झारखंड की राजनीतिक परिपेक्ष में देखा जा रहा है. झारखंड मुक्ति मोर्चा के द्वारा एक स्लोगन के साथ राजधानी रांची के चौक पर बैनर लगाए गए हैं और इस बैनर के माध्यम से दर्शाने की कोशिश की गई है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा की लोकप्रिय सरकार है.

    बैनर में लिखा है- गुरुजी है तो गुरूर है.
    हेमंत है तो हिम्मत है. 
    बसंत है तो बहार है. 
    इसलिए ही तो झा.मु.मो. की लोकप्रिय सरकार है. 
    अब न तो इस बैनर में मुख्यमंत्री की पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन का नाम है नाहीं गठबंधन की किसी अन्य पार्टी का. अब झारखंड में महागठबंधन, झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस एवं अन्य घटक दलों के साथ बनी मिली जुली सरकार है परंतु झारखंड मुक्ति मोर्चा इस बैनर के माध्यम से अपनी पार्टी की लोकप्रिय सरकार होने की बात कह रही है. जिसे लेकर राजनीतिक टिप्पणियां भी देखी जा रही है.

    राकेश सिन्हा कांग्रेस प्रवक्ता, ने रखी अपनी बात:
    झारखंड में सरकार बनाने में झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ मुख्य रूप से घटक दल के रूप में कांग्रेस शामिल है, और इस विषय पर कांग्रेस के प्रवक्ता का कहना है कि बैनर से क्या स्पष्ट हो रहा है यह राज्य की जनता का मुद्दा नहीं है. मुद्दा यह है कि झारखंड राज्य में महागठबंधन की सरकार बेहतर काम कर रही है. लोकतंत्र में अपनी भावना को प्रकट करने का अधिकार सबको है. ऐसे में बैनर के माध्यम से झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपनी भावना को प्रकट किया हैं, वैसे ही कल कांग्रेस भी अपनी भावना को प्रकट कर सकता है.

    भाजपा मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक ने झारखंड मुक्ति मोर्चा को घेरा: 
    वहीं विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता ने इस विषय पर कहा कि इस बैनर के माध्यम से झारखंड मुक्ति मोर्चा ने गठबंधन की पार्टियों को तो दूर, अपनी महिला नेत्री कल्पना सोरेन का सम्मान बढ़ाना भी स्लोगन में उचित नहीं समझा है. और रही बात गुरुर की तो किस बात का गुरूर है कि आदिवासी बच्चियों की हत्याएं हो रही हैं, किस बात की बहार है की लोग पानी के लिए तरस रहे हैं? यह शब्दों की बाजीगरी है पर राज्य में वास्तविकता क्या है यह झारखंड की जनता समझती है.


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