केवल ऑटो और टोटो ही है धनबाद की सडकों के बादशाह , जाने क्यों


धनबाद(DHANBAD): धनबाद में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के नाम पर सिर्फ ऑटो और टोटो मिलेंगे. सिटी बस तो सपने की बात ही है. अगर आपके पास अपना निजी वाहन नहीं है और आपको कहीं जाना-आना जरूरी है तो ऑटो वालों की मेहरबानी और उनके निर्देश पर ही चलना होगा. वह जितने सवारी बैठा ना चाहेंगे, बैठाने देना होगा वह जितने पैसे मांगेगे आपको भुगतान कर देना होगा अन्यथा आपके साथ बदतमीजी भी हो सकती है.
ऐसी घटनाएं रोज धनबाद शहर की सड़कों पर देखने को मिलती हैं. कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग ऑटो और टोटो वालों की मनमानी बर्दाश्त करते हैं. यह तो हुई यात्रियों की बात, शहर जाम का एक प्रमुख वजह टेंपो और टोटो है. कहीं उनका स्थाई स्टॉपेज नहीं है, जहां मन किया गाड़ी रोक दिए, जहां इच्छा हुई गाड़ी को घुमा दिए, ऐसे में पीछे से चलने वाले वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं. ऐसी बात नहीं है कि धनबाद में ट्रैफिक जवानों की तैनाती नहीं है लेकिन जवान भी बेचारे क्या करें, एक बीमारी रहे तब ना, यहां तो चारों ओर बीमारी ही बीमारी है. सबसे दुखद बात यह है कि पिछली सरकार के कार्यकाल में धनबाद को 72 सिटी बसें मिली थी.
शहर में सिर्फ चार सिटी बसें
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि धनबाद शहर में सभी सिटी बसें आज तक सड़क पर नहीं उतर पाईं. अब तो सिटी बसें कबाड़ बन गई हैं. जनता के पैसों का मजाक इससे बड़ा कुछ हो भी नहीं सकता है. अभी मात्र 3 या 4 सिटी बसें चल रही हैं, वह भी शहर के बाहर के इलाकों में. धनबाद में ट्रैफिक नियंत्रण का कोई ब्लू प्रिंट तैयार नहीं है. हाल ही के दिनों में जिला प्रशासन ने ऑटो वालों की कोडिंग करने का निर्णय लिया था, इंतजाम कुछ दूर तक आगे भी हुआ लेकिन फिर बंद हो गया. नतीजा है कि धनबाद की पब्लिक ट्रांसपोर्ट अभी पूरी तरह से ऑटो वालों के हवाले है. दूसरी कोई पब्लिक ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था नहीं है. ऑटो वालों के लिए कोई स्टैंड भी नहीं है. नतीजा है कि धनबाद की सड़कों पर लोग चलकर जीवित घर लौट रहे हैं तो यह भगवान की मर्जी है.
रिपोर्ट : शाम्भवी सिंह के साथ प्रकाश
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