टीएनपी डेस्क (Tnp desk):- नक्सलियों के खिलाफ पुलिस की लगातार कार्रवाई से हड़कंप है. उनके आतंक और खौफ का साम्राज्य भी धीरे-धीरे जमिदोंज हो रहा है. उसकी दहशत भी अहिस्ते-अहिस्ते कम होने लगी है. नक्सलियों को अब यह भ्रम मन में हो गया है कि भोले-भाले ग्रामीण उनकी मुखबिरी कर रहे हैं. लिहाजा, माओवादी अब आम ग्रामीणों को अपना निशाना बनाकर उन्हें मौत के घाट उतार दे रहें हैं.
पश्चिमी सिंहभूम में नक्सलियों का आतंक
पश्चिमी सिंहभूम जिले में भाकपा माओवादी पुलिस की मुखबिरी के संदेह में ग्रामीणों को निशाना बना रहें हैं. सोमवार की रात भी नक्सलियों ने हथियारबंद दस्ते ने गोईलकेरा थाना इलाके के अंतर्गत कटम्बा गांव में एक ग्रामीण का अपहरण कर लिया. ऐसी खबर है कि मंगलवार को उसकी हत्या कर दी गई. हालांकि, उसकी लाश की बरामदगी नहीं हुई है.
पिछले दस दिन में पांच की मौत
पिछले दस दिन में माओवादियों ने पुलिस मुखबिरी की शक में पांच लोगों की हत्या कर दी. दहशत का आलम ये है कि गेईलकेरा औऱ टोटो थाना क्षेत्र के गांवों से दर्जनों भोले भाले लोग घर-बार छोड़कर भाग रहें हैं. 22 अगस्त को बिला गांव जाने वाले बुरुसाई टोला जाने वाले रास्ते में एक 30 साल के लड़के की पत्थर कूचकर हत्या कर दी गई. अगली सुबह जब ग्रामीणों की नजर पड़ी, तो देखा कि उसके शरीर में डंडे के निशान थे. इससे पहले मिसिर बेसरा के दस्ते ने बीते हफ्ते मंगलवार को टोंटो थाना क्षेत्र के रेंगड़ाहातु गांव निवासी सुपाई मुंडा की गला रेतकर हत्या कर दी थी. नक्सिलयों ने ऐसी ही वारदात को अंजाम राजाबास-लावाबेड़ा गांव में अंजाम दिया. अर्जुन सुरीन नाम के व्यक्ति की हत्या कर शव को पेड़ से लटका दिया था . 19 अगस्त को भी माओवादियों ने पुलिस मुखबिरी करने की सजा दी. रांदो सुरीन नाम के व्यक्ति की गला रेतकर हत्या कर शव को सड़क पर बेरहमी से फेंक दिया. उसकी लाश के पास पर्चे फेंके गये थे, जिसमे लिखा गया था कि पुलिस मुखबिरी के चलते उस मौत दी गई.
नक्सलियों के बढ़ते खौफ के चलते आम गांव वाले बेहद ही असुरक्षित महसूस कर रहें है. ज्यादातर लोग गांव छोड़कर दूसरी जगह अपना ठिकाना बना रहें है, क्योंकि पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाकर नक्सली आम लोगों की जान लेने से नहीं हिचक रहें हैं. लिहाजा, इससे इलाके में दहशत कायम है.
Thenewspost - Jharkhand
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