मां भले ही खाट पर हो लेकिन जिउतिया कैसे छोड़ेगी 

     मां भले ही खाट पर हो लेकिन जिउतिया कैसे छोड़ेगी 

    धनबाद(DHANBAD): मां चाहे कितनी भी बूढी हो जाए, भले उसकी संतानों के बाल- बच्चे भी सयाने हो जाएं , वह भले ही खाट पर भी पड़ी हो लेकिन  जिउतिया  करना नहीं छोड़ती, कुछ भी हो जाए जिउतिया का त्यौहार वह उठाती ही है.  मान्यता है कि जिउतिया व्रत करने वाली माताओं के संतान दीर्घायु ,स्वस्थ और खुशहाल रहते हैं. यह पर्व आश्विन माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है.  इस पर्व को लेकर घर-घर में उत्साह का माहौल होता है.  कुछ जगहों पर आज नहाए खाए हैं तो कई लोग कल नहाए खाए करेंगे. इस त्यौहार को लेकर बाजार में भी पूरी तैयारी है. 

    मूल्य में 40% से भी अधिक की वृद्धि
     
    हालांकि दुकानदारों की मानें तो मूल्य में 40% से भी अधिक की वृद्धि हुई है. खासकर हरी सब्जियों में तो आग लगी हुई है.  लोग कहते हैं कि पूजा करना है , इसलिए खरीदारी तो करनी  ही करनी होगी.  नौ तरह की सब्जियों का भी इसमें महत्व है, इस वजह से बाजार में बहुत कम दिखने वाली सब्जियां आज पट गई हैं.  मनमाफिक मूल्य भी वसूला जा रहा है. दुकानदारों  का कहना है कि महंगाई इतनी अधिक है कि जो समान पहले ₹200 में मिलते थे ,आज उनकी  होलसेल कीमत ही 300 या उससे अधिक हो गई है. हम लोगों को तो उतना ही फायदा होता है, जितना पहले होता था लेकिन ग्राहकों की बात सुननी पड़ती है.  

    दुकानदार कहते हैं कि ग्राहक झुंझलाते हैं लेकिन हम क्या करें 

    ग्राहक भी झुंझलाते हैं. उसी तरह से सब्जी विक्रेता कहते हैं कि बरसात के कारण सब्जियों की आवक कम हो गई है.  इस कारण मूल्य तो ज्यादा नहीं बढ़ा है लेकिन कुछ अधिक है जबकि खरीदारों का कहना है कि खीरा जो आम दिनों में 30 ₹40 में बिकता  था, उसकी कीमत ₹100 से अधिक हो गई है. सतपुतिया  लगभग ₹200 किलो बिक रही है.  इसी के साथ व्रत करने वाली महिलाओं का कहना है कि दाम चाहे जो हो जाए, विधि के लिए ही सही लेकिन खरीदारी तो करनी ही पड़ेगी और पर्व तो  करना ही होगा.  कुल मिलाकर देखा जाए तो बाजार पर महंगाई की कड़ी मार है.


    रिपोर्ट : शाम्भवी सिंह के साथ प्रकाश   


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