लोहरदगा:राज्य गठन के 24 साल बाद भी नहीं बदली चारागादी गांव की तकदीर! गांव से बाहर निकलने के लिए तैरनी पड़ती है तीन नदियां,पढ़ें क्या कहते हैं ग्रामीण  

    लोहरदगा:राज्य गठन के 24 साल बाद भी नहीं बदली चारागादी गांव की तकदीर! गांव से बाहर निकलने के लिए तैरनी पड़ती है तीन नदियां,पढ़ें क्या कहते हैं ग्रामीण   

    लोहरदगा(LOHARDAGA):झारखंड राज्य गठन के लगभग 24 साल पूरे हो चुके हैं. झारखंड की मौजूदा हेमंत सोरेन सरकार अपने 4 साल का कार्यकाल पूरा करने का जश्न मना चुकी है, और हम देश का 78वां गणतंत्र दिवस कल यानि 26 जनवरी को मनाने वाले हैं, लेकिन आज भी झारखंड के लोहरदगा जिले का एक गांव ऐसा है जहां आज भी सड़क और पुल पुलिया सहित मूलभूत सुविधाएं  ग्रामीणों को नसीब नहीं हो पाई है. लोहरदगा और लातेहार जिला के सीमा पर स्थित सलगी पंचायत के इस चारागादी गांव के ग्रामीणों की बदनसीबी है कि आज भी ग्रामीण गांव से बाहर जाने के लिए तीन नदियों में डूबकर बाहर जाते है, क्योंकि किसी भी नदी पर पुल नहीं है, सड़क की जगह पगडंडियां ही है.

    ग्रामीणों को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए लातेहार जिला में निर्भर रहना पड़ता है

    वहीं गांव से आंगनबाड़ी केंद्र और पोलिंग बूथ 20 किलोमीटर दूर पंचायत मुख्यालय में स्थित है.करीब 28 घरों का यह गांव जंगल पहाड़ों से घिरा हुआ है.लोहरदगा जिला में रहने वाले इन ग्रामीणों को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए लातेहार जिला में निर्भर रहना पड़ता है.बरसात के महीने में जब पहाड़ी नदी उफान होती है, उस समय यह चारागादी गांव पूरी तरह से टापू बन जाता है. गांव के बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और महिलाएं बच्चों के बीमार होने पर उन्हें गोदी में उठाकर अस्पताल तक पहुंचती है, बुनियादी सुविधाओं को तरसते ग्रामीण सरकार से खासे नाराज हैं.नाराज इतने है कि इन्होंने फैसला किया है कि इस बार चुनाव में किसी नेता और अधिकारी को गांव में घुसने नहीं देंगे और न ही वोट डालने 20 किलोमीटर दूर जाएंगे, इनलोगों ने वोट बहिष्कार का निर्णय लिया है, क्योंकि इन्हें बार-बार वादे के नाम पर धोखा दिया जाता है. झूठे आश्वासन दिए जाते हैं.

    ग्रामीणों ने कहा नेता या अधिकारी वोट के नाम पर गांव आएंगे तो घुसने नहीं दिया जायेगा

     वहीं ग्रामीणों का कहना है कि सालों साल से हमलोगों की मांग रही है कि इस इलाके में सड़क, पुलिया और मूलभूत सुविधाएं मिले, लेकिन पोलिंग बूथ भी गांव से उठाकर 12 किलोमीटर  दूर सलगी गांव में ले जाया गया.अब पहले पुल और सड़क बन जायेगा, तो वोट देंगे,  नहीं तो कोई नेता या अधिकारी वोट के नाम पर गांव आएंगे तो उन्हें चारागादी गांव में घुसने नहीं दिया जायेगा. 2024 में वोट का बहिष्कार रहेगा. बरसात में गांव के बच्चे बूढ़े और महिलाओ को काफी परेशानी होती है, यदि किसी को अस्पताल जाना पड़ता है तो काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है जिला प्रशासन से मांग है कि गांव में पुल का निर्माण कर मूलभूत सुविधाओं से गांव को जोड़ा जाए.

    पढ़ें डीसी ने मामले पर क्या कहा

    वहीं पूरे मामले में कुडू सीओ का कहना है कि उन्होंने इस गांव में पहली बार बीडीओ के साथ पहुंचकर मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराने का काम किया है, लोहरदगा डीसी डॉ वाघमारे प्रसाद कृष्ण ने कहा कि गांव के विकास और मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए सरकारी प्रक्रिया पूरी करते हुए विकास को गांव तक पहुंचाने का काम करेंगे.सरकार कितना ही दावा कर ले, लेकिन झारखंड में चारागादी जैसे गांव भी है जहां विकास और सरकार की बात नहीं पहुंचती है. सुबह से लेकर शाम तक जीवन संघर्ष में खत्म हो जाता है. चुनावी मुद्दों में आज भी मूलभूत सुविधाएं झारखंड के कोने कोने तक नहीं पहुंची है.

    रिपोर्ट: लोहरदगा ब्यूरो 


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