अपने ही सरकार के खिलाफ लोबिन का मोर्चा, P-PESA कानून को लेकर विधानसभा के बाहर धरने की शुरूआत

    अपने ही सरकार के खिलाफ लोबिन का मोर्चा, P-PESA कानून को लेकर विधानसभा के बाहर धरने की शुरूआत

    रांची (RANCHI) : झारखंड विधानसभा मॉनसून सत्र का आज पांचवां दिन है औऱ पांचवे दिन सदन के बाहर एक तरफ विपक्ष के तमाम नेता सरकार पर हमला बोल रहे हैं. तो वहीं दूसरी तरफ झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक लोबिन हेंब्रम भी अपने ही सरकार को घेर रहे हैं. बता दें कि आज विधानसभा के बाहर लोबिन हेंब्रम सरकार से पेसा कानून लागू करने की मांग कर धरना पर बैठ गए है.  

    सरकार की उदासीन रवैया के कारण राज्य में नहीं लागू हुआ पेसा कानून

    बता दें कि लोबिन हेंब्रम आज अपनी मांग पत्र के साथ धरना पर बैठे है. उन्होंने कहा कि जब पेसा कानून बिहार में लागू हो सकता है तो झारखंड में क्यों नहीं. साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार की उदासीन रवैया के कारण आज राज्य में पेसा कानून लागू नहीं हो रहा है. जिससे उन्होंने सिधे तौर पर ही अपने सरकार पर हमला बोला है.

    लोबिन  हेम्ब्रम ने इन कानून को लागू करने की मांग

    सदन के बाहर लोबिन हेंम्ब्रम ने अपने हाथ में पोस्टर लेकर सरकार से राज्य में यह कानून लागू करने की मांग की है. जिसमें उन्होंने

    1.24 दिसंबर 1996 को लागू P-PESA अधिनियम को मूल रूप से अविलंब लागू करें

    2. P-PESA अधिनियम की धारा 3, धारा 4 (D) धारा 4 (0), धारा 4(m) धारा 5 के तहत राज्य सरकार अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करें.

    3. 26 जुलाई 2023 को प्रकाशित गजट अधिसूचना को अभिलंब रद्द करो.

    4.26 जुलाई 2023 को जारी नियमावली के ड्राफ्टिंग करने वालों पर कार्यवाही करो

    लोबिन हेम्ब्रम ने विधायक अध्यक्ष से लगाई सुरक्षा की गुहार

    वहीं आपकों बता दें कि कल सदन में शून्य काल का प्रशन चल रहा था. इस दौरान झामुमो विधायक लोबिन हेम्ब्रम ने विधायक अध्यक्ष से हाथ जोड़ कर गुहार लगाया कि उन्हें Y कैटगरी की सुरक्षा दी जाए. हाथ जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि वह विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठाते है. राज्य में विधि व्यवस्था हो या फिर अवैध खनन और जंगल पर सरकार और अधिकारियों से सवाल पूछते हैं. जिससे उन्हें जान का खतरा है. लोबिन ने कहा कि अगर उनकी बात पर विचार नहीं किया जाएगा तो वह केंद्र सरकार से सुरक्षा की गुहार लगाएंगे.

    क्या है P-PESA कानून

    P-PESA कानून का पूरा नाम Panchayat Extension to Scheduled Areas Act है. जो कि 1986 में पंचायती राज व्यवस्था में अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार करते हुए पेसा कानून की शुरुआत की गई थी. आसान भाषा में इसे समझें तो इस कानून की तीन प्रमुख बाते हैं- जल, जंगल और जमीन का अधिकार. इस कानून के जरिए जमीन के अधिकार को सशक्त बनाया गया है.साथ ही भूमि के इस अधिकारों के तहत आदिवासियों को मजबूत बनाने की बात कही गई है.


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