ठेकुआ बिना अधूरा है छठ महापर्व, स्वाद ही नहीं सेहत का भी 'राजा' है महाप्रसाद ठेकुआ

    ठेकुआ बिना अधूरा है छठ महापर्व, स्वाद ही नहीं सेहत का भी 'राजा' है महाप्रसाद ठेकुआ

    रांची(RANCHI): छठ महापर्व का आज तीसरा दिन है और आज सभी व्रती घाट पर पहुंच कर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगी.जिसके बाद कुछ व्रती रात भी छठ घाट पर बिताएंगी. वहीं सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद छठ महापर्व सम्पन्न हो जाएगा.  

    ठेकुआ के बिना अधूरा छठ महापर्व

    खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद छठ पूजा में ठेकुआ बनाया जाता है. जो भगवान सूर्य को चढ़ाया जाता है. दूसरे त्यौहार में फल फूल का महत्व है. लेकिन छठ महापर्व में ठेकुआ को ही भगवान भास्कर को समर्पित किया जाता है. छठ की पूजा इसके बिना अधूरी मानी जाती है. छठ के सूप में इसे शामिल करने के पीछे वैज्ञानिक तर्क यह है कि छठ के साथ सर्दी की शुरुआत हो जाती है और ऐसे में ठंड से बचने और सेहत को ठीक रखने के लिए गुड़ बेहद फायदेमंद होता है.

    सुबह से ही बाजार में भीड़

    छठ महापर्व को लेकर बाजारों में भीड़ दिख रही है.जो भी छठ वर्ती है वह सुबह से ईख और अन्य सामग्री के लिए बाजार में दिख रही है.वहीं दोपहर बाद से सभी वर्ती अपने अपने घाट के लिए निकलेंगी. छठ को लेकर घाट भी पूरी तरह से सज धज का तैयार है बस अब इंताजार है कि व्रती कब घाट पर पहुँचती है. छठ घाट का नजारा काफी विहंगम होता है.

    36 घंटे का निर्जला व्रत रखती है व्रती

    छठ महापर्व एक ऐसा पर्व है जिसमें साफ सफाई की भी पूरा खयाल रखा जाता है. छठ महापर्व चार दिनों तक चलता है.पहले दिन नहाय खाए के साथ छठ महापर्व शुरू हो जाता है. उसके बाद दूसरे दिन खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद छठ व्रती निर्जला उपवास रखती है.जो छठ महापर्व के चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद उपवास खत्म होता है. उपवास के दौरान पानी तक व्रती नहीं पिती है. यही कारण है कि छठ को महापर्व का दर्जा दिया गया है.                    

     


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