तिरंगे के तीनों रंग के क्या हैं मायने, ध्वज के बीच चक्र के इतिहास को जानिये

    तिरंगे के तीनों रंग के क्या हैं मायने, ध्वज के बीच चक्र के इतिहास को जानिये

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK):  देश आज आजादी के 75 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है. आजादी के अमृत महोत्सव के तहत स्वतंत्रता दिवस को खास बनाने के लिए सरकार ने 'हर घर तिरंगा' कैंपेन चलाया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर देशवासियों से हर घर तिरंगा अभियान मनाने की अपील की थी. 13 अगस्त से 15 अगस्त तक लोग अपने-अपने घरों पर तिरंगा झंडा भी फहराए. लेकिन इस तिरंगे के पीछे की कहानी क्या है, शायद ये बहुत कम लोगों को ही पता होगा.

    आपको बता दें कि 116 सालों में भारत का झंडा कुल 6 बार बदला जा चुका है. आइए जानते हैं कि भारत के झंडे में तीनों रंग केसरिया, सफेद और हरा का क्या है मतलब. दरअसल, तिरंगे में तीन रंग हैं. इसलिए इसे तिरंगा कहा जाता है. तिरंगे के हर रंग का विशेष महत्व और अलग होता है. चलिए बताते है हर रंग का मतलब क्या है.

    केसरिया रंग

    तिरंगे के सबसे ऊपर होता है केसरिया रंग. यह रंग साहस और बलिदान को प्रदर्शित करता है.

    सफेद रंग  

    तिरंगे के बीच में यानी दूसरे नंबर पर सफेद रंग है. ये शांति और सत्य को प्रदर्शित करता है.

    हरा रंग

    तिरंगे में सबसे नीचे यानी तीसरा रंग हरा है. इस रंग को संपन्नता, खुशहाली, विश्वास, समृद्धि और प्रगति का प्रतीक माना जाता है.

    तिरंगा में चक्र का अर्थ

    तिरंगे के सफेद रंग की पट्टी के मध्य में एक चक्र है, जिसे अशोक च्रक कहा जाता है. इसमें 24 तीलियां हैं. ये च्रक नीले रंग का है. इस चक्र को सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ से लिया गया था. ये 24 तीलियां मनुष्य के 24 गुणों को दर्शातीं हैं. इन 24 तीलियों से ही मनुष्य के लिए बनाए गए 24 धर्म मार्ग की तुलना की गई है. दरअसल, आजादी के बाद प्रधानमंत्री पंडित नेहरू के कहने पर झंडे के बीच में चरखे की जगह नीले रंग का अशोक चक्र रखा गया. इसमें 24 तीलियां 24 घंटे विकास और रफ्तार की भी प्रतीक हैं. नीला रंग खुले आसमान की विशालता और पानी की गहराई दर्शाता है.


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