सावन के चौथे सोमवारी को समुद्र मंथन में किसकी उत्पति हुई थी, जानिए अंतिम सोमवारी की आध्यात्मिक कथा

    सावन के चौथे सोमवारी को समुद्र मंथन में किसकी उत्पति हुई थी, जानिए अंतिम सोमवारी की आध्यात्मिक  कथा

    देवघर (DEOGHAR): श्रावण मास की चौथी और अंतिम सोमवारी पर देवघर के बाबा मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी हैं. भीड़ का आलम यह है कि देर रात से ही जलार्पण के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगने लगी थी. श्रावण की चौथी और अंतिम सोमवारी का दिन और तिथि के दृष्टिकोण से विशेष महत्व बताया जा रहा है. सोमवार दिन के साथ एकादशी तिथि हैं. जानकार इसे शिव आराधना के लिए एक उत्तम दिन बता रहे हैं. जानकारों के अनुसार आज के दिन भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करने से सभी मनोवांछित फल की प्राप्ति होती हैं. यही कारण है कि आज बड़ी तादाद में श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने देवघर पहुंचे हैं.

    इस दिन हुआ था गाय का आविर्भाव

    शास्त्र के जानकारों के अनुसार श्रावण के प्रत्येक सोमवार को समुद्र मंथन से समृद्धि के प्रतीक की प्राप्ति हुई थी. सावन के चौथे सोमवार को समुद्र मंथन के बाद कामधेनु गाय का आविर्भाव हुआ था. गाय धन, वैभव और ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है. इसलिए मान्यता है कि सावन के चौथे सोमवार को शिव की आराधना से भक्त को हर तरह की सुख-समृद्धि, धन, वैभव और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. इन्हीं सब कारणों से आज की सोमवरी का खास महत्व हैं.

    श्रद्धालुओं का सुलभ दर्शन

    इतनी बड़ी तादाद में जलार्पण के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को सुलभ और सुरक्षित जलार्पण की पूरी व्यवस्था की गई है. इसके लिए प्रशासन की ओर से अतिरिक्त दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. सावन की चौथी और अंतिम सोमवरी पर देवघर में 2 से ढाई लाख की भीड़ जुटने की उम्मीद की जा रही है.

    रिपोर्ट: रितुराज सिन्हा, देवघर

     

     

     


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