झारखंड चुनाव में गेम चेंजर बनी कल्पना सोरेन! इंडिया गठबंधन में इस स्टार प्रचारक को अपने यहां बुलाने की मची है होड़

    झारखंड चुनाव में  गेम चेंजर बनी कल्पना सोरेन!  इंडिया गठबंधन में इस स्टार प्रचारक को अपने यहां बुलाने की मची है होड़

    रांची (RANCHI) : लोकसभा चुनाव के बाद झारखंड की राजनीति में एक नाम बहुत तेजी से उभरा है, वो है कल्पना सोरेन. कल्पना सोरेन के प्रचार में लोगों की भीड़ देखने को मिल रही है. खासकर आदिवासी मतदाताओं के लिए वो आकर्षण का केंद्र बन गई हैं. इतना ही नहीं कल्पना की रैलियां भी पार्टी के लिए गेम चेंजर का काम कर रही हैं. कल्पना सोरेन ने बहुत कम समय में लंबा राजनीतिक सफर तय किया है. इसमें कोई शक नहीं है कि वे जेएमएम की स्टार प्रचारक के तौर पर उभरी हैं और इंडिया ब्लॉक में भी उनकी मांग बढ़ी है. स्थानीय भाषा के अलावा हिंदी और अंग्रेजी पर भी उनकी बराबर पकड़ है.

    कार्यकर्ताओं को संबोधित करने का उनका जोशीला अंदाज और पार्टी कार्यक्रमों में उनके भाषणों ने उन्हें लोकप्रिय बना दिया है. कल्पना सोरेन का जेएमएम कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ बहुत अच्छा जुड़ाव है. जिस सकारात्मक भाव से वे खुद को अभिव्यक्त करती हैं, उससे बड़ी संख्या में लोग उनकी ओर आकर्षित होते हैं. उनकी नई पहचान तब बनी जब राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया.

    ...और कल्पना ऐसे बन गईं JMM की सबसे बड़ी उम्मीद

    मार्च 1985 में जन्मी कल्पना ओडिशा से एमबीए की डिग्री के साथ इंजीनियरिंग स्नातक हैं. जनवरी 2024 में अपने पति हेमंत सोरेन को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद वह सक्रिय राजनीति में आईं. उन्होंने अपने पति और झारखंड के तत्कालीन सीएम की विरासत संभाली. लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली के रामलीला मैदान में अपने पहले राजनीतिक भाषण में उन्होंने एक परिपक्व नेता के गुणों का प्रदर्शन किया. उन्हें लोकसभा चुनाव के दौरान इंडिया ब्लॉक की ओर से झारखंड में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी दी गई थी. कल्पना सोरेन ने आदिवासियों के लिए आरक्षित सभी 5 लोकसभा सीटों पर प्रचार किया और इंडिया ब्लॉक ने उन सभी सीटों पर जीत हासिल की. ​​गिरिडीह के गांडेय में उपचुनाव में सफलता हासिल करने के बाद उनका आत्मविश्वास भी धीरे-धीरे बढ़ता गया. उन्होंने 26000 वोटों के अंतर से जीत हासिल की.

    JMM के लिए क्राउड पुलर बनकर उभरी हैं कल्पना

    सरफराज अहमद के राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी. कल्पना ने हेमंत सोरेन का आधा बोझ कम कर दिया है. सीएम के तौर पर हेमंत प्रशासन संभालते हैं, जबकि कल्पना पार्टी के प्रचार और कार्यकर्ताओं को संभालती हैं. चाहे वह भाजपा का गढ़ हो या कोल्हान टाइगर के नाम से मशहूर चंपई सोरेन का इलाका. मंईयां सम्मान योजना के लिए आयोजित 70 सार्वजनिक कार्यक्रमों में कल्पना सोरेन ने खूब भीड़ जुटाई.

    कल्पना सोरेन ने भाजपा पर किया हमला

    कल्पना सोरेन ने भाजपा के नारे 'बटेंगे तो काटेंगे' पर हमला करते हुए कहा कि यह भाजपा की कमजोरी की ओर इशारा करता है. सोरेन ने कहा कि भाजपा के कुछ नेता 'बटेंगे तो काटेंगे' जैसे बयानों का इस्तेमाल कर रहे हैं. ये वो नेता हैं जो सम्मानजनक पदों पर बैठे हैं. यह शर्मनाक हरकत है. उन्होंने कहा कि स्थानीय भाजपा नेता ऐसी टिप्पणी नहीं कर रहे हैं. उनके पास दिखाने के लिए कोई रिपोर्ट कार्ड नहीं है.

    वहीं असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर निशाना साधते हुए कल्पना सोरेन ने कहा कि हिमंता को अपने राज्य का ख्याल रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन के लिए हिमंता बिल्कुल भी चुनौती नहीं हैं. झारखंड के लोगों ने अपने राज्य की जिम्मेदारी हेमंत सोरेन को दी है और वह उनका ख्याल रखेंगे. 

     

     

     


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