झामुमो स्थापना दिवस : धनबाद की सड़कों पर लोकल नेताओं में कैसे छिड़ा  है "होर्डिंग वार", पढ़िए इस रिपोर्ट में  

    झामुमो स्थापना दिवस : धनबाद की सड़कों पर लोकल नेताओं में कैसे छिड़ा  है "होर्डिंग वार", पढ़िए इस रिपोर्ट में  

    धनबाद(DHANBAD): झारखंड में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी का उत्साह धनबाद की सड़कों पर दिख रहा है. झामुमो  के नेताओं ने शहर के प्राय सभी होर्डिंग बुक कर ली है.  धनबाद सिटी सेंटर से लेकर बरवाअड्डा  तक की सड़क के दोनों तरफ की होर्डिंग के अलावे लुबी सर्कुलर रोड की होर्डिंग झामुमो  के नेताओं के लिए समर्पित है. इसके साथ ही धनबाद के गोल्फ ग्राउंड में तैयारी शुरू हो गई है. कट आउट लग गए है. झारखंड मुक्ति मोर्चा 4 फरवरी को धनबाद में स्थापना दिवस कार्यक्रम को भव्य बनाने की तैयारी में है.  इसके बहाने शक्ति प्रदर्शन की तैयारी भी चल रही है. इसके अलावे होर्डिंग वार में आगे निकलने की भी स्थानीय नेताओं में प्रतियोगिता चल रही है.  

    शहर से लेकर गांव तक चहल-पहल हो गई है तेज 

    शहर से लेकर गांव तक चहल-पहल तेज है. शहर के चौक -चौराहा से लेकर प्रखंड और गांव को झंडा से पाटने  का प्रयास शुरू कर दिए गए  है. नेता रात -दिन मिहनत  कर रहे है.  4 फरवरी के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित गांडेय  विधायक कल्पना सोरेन मौजूद रहेंगी. शिबू सोरेन स्वास्थ्य कारणों  से उपस्थित नहीं होंगे. अब तक झारखंड मुक्ति मोर्चा का स्थापना दिवस कार्यक्रम देर रात तक चलता था. लेकिन अब समय बदल दिया गया है. कोरोना काल  के बाद से ऐसा किया गया है. 4 फरवरी को कार्यक्रम दोपहर एक बजे शुरू होगा और शाम होते-होते संपन्न हो जाएगा. कार्यक्रम में धनबाद जिले सहित अगल-बगल के कई जिलों के कार्यकर्ता और नेता शामिल होंगे. झारखंड में सत्तासीन  झारखंड मुक्ति मोर्चा की जन्मस्थली धनबाद ही  है. 

    2 फरवरी को दुमका में मनेगा स्थापना दिवस 

     2 फरवरी को दुमका में झामुमो  का स्थापना दिवस मनाया जाएगा तो 4 फरवरी को धनबाद में स्थापना दिवस मनेगा. धनबाद में ही झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना हुई थी. उसके बाद से लगातार 4 फरवरी को धनबाद में स्थापना दिवस मनाया जाता रहा है. यह अलग बात है कि पहले यह कार्यक्रम रात 9 बजे शुरू होता था और सुबह तक चलता था.  लेकिन अब कोविड  काल  के बाद दिन में  कार्यक्रम शुरू होता है और शाम 7 बजे तक खत्म हो जाता है.कहा जाता है कि स्थापना दिवस के बाद कल्पना सोरेन को कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है. इसके कई वजह है. हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद उत्पन्न हुई प्रतिकूल परिस्थितियों में कल्पना सोरेन ने जिस मजबूती और दृढ़ता के साथ स्थितियों को संभाला, उसके बाद वह सबकी निगाहों में आ गई. कल्पना सोरेन ने खुद को साबित किया. हेमंत सोरेन की गैर मौजूदगी में न सिर्फ लोकसभा चुनाव में इंडिया ब्लॉक का नेतृत्व किया, बल्कि विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने यह साबित कर दिया कि पार्टी को उनकी जरूरत है.  दूसरे दलों के नेता भी अपने विधानसभा क्षेत्र में कल्पना सोरेन की मौजूदगी चाह  रहे थे. इसके अलावा  हेमंत सोरेन की अनुपस्थिति में उन्होंने इंडिया ब्लॉक की कई बैठकों में हिस्सा लिया. 

    झारखंड में स्टार प्रचारक के रूप में उभरी कल्पना सोरेन 
    झारखंड का नेतृत्व किया, विधानसभा चुनाव में उन्होंने फिर से गांडेय  विधानसभा से जीत हासिल की. वह स्टार प्रचारक के रूप में उभरी और पूरे राज्य में धुआंधार प्रचार किया. विधानसभा चुनाव में उन्होंने लगभग 100 रैलियां और रोड शो किये. इस बात की पूरी संभावना है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा  में उन्हें नई और बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. बता दें कि झारखंड झुकेगा नहीं, इंडिया रुकेगा नहीं. यह नारा देकर कल्पना सोरेन चर्चा में आई थी.  राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के समापन पर  कल्पना सोरेन ने मुंबई में इस नारे की जोरदार ढंग से वकालत की थी. पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद और लोकसभा चुनाव के बीच कल्पना सोरेन की झारखंड की राजनीति में एंट्री हुई. इस एंट्री को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाते रहे. झारखंड की राजनीति में कल्पना सोरेन परिस्थिति  बस ही आई जरूर ,  लेकिन राजनीति में आते ही उन्होंने लोगों का भरोसा जितने में बहुत वक्त नहीं लिया. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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