झारखंड मंत्रिमंडल:कांग्रेस कोटे में ओबीसी का दावा कमजोर तो अनुसूचित जाति पढ़िए कैसे बना है सामान्य वर्ग के लिए खतरा!

    झारखंड मंत्रिमंडल:कांग्रेस कोटे में ओबीसी का दावा कमजोर तो अनुसूचित जाति पढ़िए कैसे बना है सामान्य वर्ग के लिए खतरा!

    धनबाद(DHANBAD): झारखंड में कांग्रेस कोटे के मंत्रियों के नाम का गुण -गणित फिलहाल दिल्ली के हाथ में है. सूचि अभी रांची नहीं पहुंची है. केसी बेणुगोपाल   इस मामले पर  निगाह गड़ाए हुए हैं. लेकिन इस बीच दिल्ली से छनकर ,जो सूचना धनबाद पहुंची है. उसके अनुसार कांग्रेस कोटे के मंत्रियों में ओबीसी पिछड़ता दिख रहा है. सामान्य वर्ग दावेदारी तो कर रहा है, लेकिन उसकी जमीन भी उतनी मजबूत दिख नहीं रही है. 2024 के विधानसभा चुनाव में पाकुड़ और जामताड़ा से दो अल्पसंख्यक विधायक चुनकर आए हैं. जिनमे एक महिला है. जबकि रामगढ़ और पोड़ैयाहाट से ओबीसी के विधायक चुने गए हैं. 

    सामान्य वर्ग से दो महिला सहित तीन चुनकर आये है 

    इनमें एक महिला है. दूसरी ओर सामान्य वर्ग से महागामा, बेरमो और बोकारो से तीन विधायक चुनकर आए हैं. इनमें दो महिलाएं हैं. जबकि आदिवासी सुरक्षित सीट से सात विधायक कांग्रेस के चुन कर आए हैं.  जिन आरक्षित आदिवासी सीटों से कांग्रेस के विधायक जीते हैं, उन सीटों में जगन्नाथपुर, खिजरी, मांडर, मनिका, लोहरदगा, कोलेबिरा और सिमडेगा शामिल है. अनुसूचित जाति के दो विधायक छतरपुर और कांके से जीतकर आए हैं. ऐसे में आदिवासी विधायकों का दावा मजबूत दिख रहा है .अल्पसंख्यक कोटे से कम से कम एक मंत्री तो बनेंगे ही. और अगर अनुसूचित जाति कोटे से भी एक मंत्री बने तो सामान्य वर्ग भी प्रभावित हो सकता है. 

    ओबीसी  अधिक सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन जीते केवल दो ही 

    ओबीसी के बारे में कहा जाता है कि इस बिरादरी के प्रत्याशी अधिक सीटों पर चुनाव लड़े, लेकिन जीत सिर्फ दो ही  पाए. ऐसे में हो सकता है कि ओबीसी कोटे से मंत्रियों के नाम पर विचार नहीं किया जाए. अगर आदिवासी सुरक्षित सीटों से जीते विधायकों में दो को मंत्री पद दिया जाता है. और अल्पसंख्यक कोटे से एक मंत्री पद मिलता है. तो फिर अनुसूचित जाति और सामान्य वर्ग के बीच में मामला फंसेगा. हो सकता है अगर अनुसूचित जाति पर विचार हुआ तो सामान्य वर्ग भी मंत्री पद से वंचित हो सकता है. और अगर सामान्य वर्ग पर विचार हुआ तो अनुसूचित जाति मंत्री पद से हाथ धो सकता है.

    2024 का चुनाव कई समीकरण को बनाया और बिगाड़ा है 
     
    वैसे भी झारखंड की राजनीति में 2024 का चुनाव ने  कई नई राह खोले  है. कई तरह के समीकरण को बनाया और बिगाड़ा है. 2024 के चुनाव में गठबंधन में शामिल दलों में झामुमो को 34 सीट, कांग्रेस को 16 सीट, राजद को चार सीट, माले को दो सीट आई है. जबकि 2019 के चुनाव में झामुमो को 30 सीट, कांग्रेस को 16 सीट, राजद को एक सीट और माले को एक सीट मिली थी. इधर, एनडीए की बात की जाए तो भाजपा को 21, आजसू को एक, जदयू को एक और लोजपा को एक सीट मिली है. जबकि 2019 में भाजपा को 25 सीट, आजसू को दो सीट ,जदयू को शून्य और लोजपा को शून्य सीट  मिली थी. इस बार के चुनाव में एनडीए को बुरी तरह से हार मिली है. देखना है मंत्रिमंडल में किसके भाग्य चमकते हैं और कांग्रेस कोटे में किसे निराशा हाथ लगती है.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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