झरिया संशोधित मास्टर प्लान से विस्थापितों को फ़ायदा कि नुकसान, क्यों उठाये जा रहे सवाल, पढ़िए इस रिपोर्ट में !

    झरिया संशोधित मास्टर प्लान से विस्थापितों को फ़ायदा कि नुकसान, क्यों उठाये जा रहे सवाल, पढ़िए इस रिपोर्ट में !

    धनबाद (DHANBAD) : झरिया पुनर्वास के लिए संशोधित मास्टर प्लान की मंजूरी के बाद कोयलांचल में इसकी अलग-अलग ढंग से व्याख्या की जा रही है. किसको कितना फायदा होगा, मास्टर प्लान कितना सफल होगा. एक्सपर्ट से लेकर जानकार अपनी-अपनी राय दे रहे है. इस बीच संशोधित मास्टर प्लान में जो संकेत हैं, उसके अनुसार कट ऑफ डेट 2004 को बदलकर 2019 कर दिया जा सकता है. इससे असुरक्षित क्षेत्र में रहने वाले आईडेंटिफायड  595 स्थान के वैध-अवैध ढंग से रहने वाले लाभान्वित हो सकेंगे. कट ऑफ डेट अगर 2019 हुआ, तो लाभान्वित होने वाले की संख्या एक लाख चार हज़ार से अधिक हो सकती है. सूत्रों के अनुसार प्रभावित क्षेत्र में अवैध कब्जाधारियों की संख्या 72, 882 है. जो जमीन के असली मालिक की संख्या के मुकाबले डबल है. संकेत है कि रैयतों को 50 वर्ग मीटर में बना हुआ मकान उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है. जबकि अवैध कब्जाधारियों के लिए 39.92 वर्ग मीटर का मकान बनेगा. सिर्फ मकान के आकार में अंतर होगा, बाकी सब कुछ सामान्य रहेगा. 

    शिफ्टिंग खर्च को पांच गुना बढ़ा दिया गया है 

    एक बात और हुई है कि संशोधित मास्टर प्लान में शिफ्टिंग खर्च को 10,000 से बढ़ाकर ₹50,000 कर दिया गया है. इस प्लान में विस्थापितों की कॉलोनी बेलगड़िया टाउनशिप के भी विकास की तैयारी है. कुछ योजनाएं चल रही हैं, तो कुछ आगे चलेंगी. इस संबंध में कुछ एक्सपर्ट बताते हैं कि पहले की पुनर्वास योजना की सफलता को जांचने के लिए  पहले फेज में सिर्फ अति संवेदनशील 15,000 परिवारों के पुनर्वास के लिए राशि स्वीकृत की गई है. पुनर्वास के लिए जेआरडीए और बीसीसीएल काम करेंगे. फेज वन अगर सफल नहीं हुआ, तो आगे पुनर्वास की योजना प्रभावित हो सकती है. इस योजना में कठोर मॉनिटरिंग का प्रावधान किया गया है. ऐसी भी व्यवस्था की गई है की जगह छोड़ने के लिए विस्थापितों को ज्यादा वक्त नहीं मिले. एक तरफ मुआवजे का भुगतान होगा, दूसरी तरफ घर खाली करना होगा. खाली करने के बाद तुरंत घर को जमींदोज  कर दिया जाएगा ताकि अवैध कब्जा नहीं हो सके. 

    झरिया  कोलफील्ड बचाओ समिति के अध्यक्ष राजीव शर्मा का कहना है 

    इधर, झरिया कोलफील्ड बचाओ समिति के अध्यक्ष राजीव शर्मा ने कहा है कि झरिया के लिए नए मास्टर प्लान से झरिया कोलफील्ड के रैयतों और गैर रैयतों के साथ न्याय नहीं हुआ है. इसके पूर्व संशोधित मास्टर प्लान में 5 लाख +3 लाख क्रेडिट लाइन + 50 हजार शिफ्टिंग और 2 वर्ष का भाड़ा भत्ता का उल्लेख था. झरिया कोलफील्ड बचाओ समिति ने प्रधानमंत्री कार्यालय को गैर रैयतों के लिए 20 लाख तक के लाभ, जिनमें सरकारी योजनाओं प्रधानमंत्री आवास योजना सहित भूमिहीनों और कमजोर वर्ग के लिए चलाई जा रही योजनाओं के साथ कुल 20 लाख का लाभ देने का आग्रह किया था. रैयतों के लिए LAAR 2013 के अंतर्गत तथा मकान के मूल्य के साथ साथ उपरोक्त सुविधाएं देने का आग्रह किया गया था.  लेकिन इस 5940 करोड़ के नए मास्टर प्लान में सिर्फ 1 लाख + 3 लाख की क्रेडिट लाइन का उल्लेख है. झारखंड में विस्थापितों के साथ सदा से अन्याय होता रहा है, पूर्व में मैथन, पंचेत, सिंदरी , बोकारो स्टील , कोयला क्षेत्र सदा यहां के लोग छले गए है. प्रधानमंत्री से मांग है कि इस पर पुनर्विचार किया जाए, जिससे यहां के लोगों के साथ न्याय हो सके.

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो  


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