झरिया सीट पर "दो गोतनी" की लड़ाई में भाजपा को जीत दिलाना महानगर अध्यक्ष श्रवण राय की होगी बड़ी चुनौती 

    झरिया सीट पर "दो गोतनी" की लड़ाई में भाजपा को जीत दिलाना महानगर अध्यक्ष श्रवण राय की होगी बड़ी चुनौती 

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद महानगर भाजपा और ग्रामीण भाजपा जिला अध्यक्षों की घोषणा हो गई है. श्रवण राय महानगर भाजपा के अध्यक्ष बने हैं तो घनश्याम ग्रोवर ग्रामीण भाजपा जिला अध्यक्ष बनाए गए हैं. यह नियुक्ति तो प्रदेश से हुई है, इसलिए कोई सीधे तौर पर तो विरोध करने का साहस नहीं करेगा. लेकिन भीतर ही भीतर इस इस मनोनयन का विरोध भी होगा. दोनों जिला अध्यक्षों के लिए यह बड़ी चुनौती होगी की पुरानी समिति के लोगो को समेटकर संगठन को कैसे आगे लेकर चलें .

    महानगर के अधीन धनबाद के तीन विधानसभा क्षेत्र धनबाद, झरिया और बाघमारा आते हैं .जबकि ग्रामीण जिला अध्यक्ष के अधीन टुंडी, निरसा और सिंदरी विधानसभा क्षेत्र आते हैं. फिलहाल धनबाद, बाघमारा, निरसा और सिंदरी भाजपा के कब्जे में है, जबकि झरिया से कांग्रेस और टुंडी से झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक हैं. ऐसे माना जाता है कि जिले के जो  मजबूत नेता होते हैं, जिला अध्यक्ष पर उनकी पकड़ अधिक होती है. उनसे रायशुमारी करने के बाद ही जिला अध्यक्षों की घोषणा होती है. श्रवण राय और घनश्याम ग्रोवर के मामले में राय शुमारी हुई है  अथवा नहीं ,इसकी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. लेकिन यह बात तो सच है कि पिछले कई सालों तक जिला अध्यक्ष सांसद पशुपतिनाथ सिंह के समर्थक हुआ करते थे. चर्चा यह है कि श्रवण राय विधायक राज सिंह के समर्थक हैं.

    श्रवण राय को धनबाद ,झरिया और बाघमारा विधानसभा क्षेत्र देखना होगा. झरिया में भाजपा को जीत दिलाना एक चुनौती होगी .अब तक की संभावना के मुताबिक झरिया सीट पर दो गोतनी आपस में टकराएंगी. एक कांग्रेस से होगी तो दूसरी भाजपा से हो सकती है. इस प्रकार ग्रामीण जिला अध्यक्ष को टुंडी और सिंदरी सीट पर अधिक काम  करना होगा. सिंदरी विधायक लंबी बीमारी के कारण एक्टिव नहीं है.  सिंदरी और निरसा में लाल झंडे का प्रभाव रहता है. 2019 के चुनाव में तो फॉरवर्ड ब्लॉक से भाजपा में आई अपर्णा सेनगुप्ता चुनाव जीत गई. लेकिन इस जीत को बरकरार रखने के लिए संगठन स्तर पर काम करने की जरूरत होगी.  कुल मिलाकर पुरानी कमेटी के लोगों को एक सूत्र में पिरोना दोनों जिला अध्यक्षों के लिए चुनौती होगी. क्योंकि महानगर और ग्रामीण जिला अध्यक्ष के लिए कई लोग कतार में थे. उनकी उम्मीदें टूटी है. वैसे सीधे तौर पर विरोध नहीं होगा लेकिन गुट बाजी को हवा मिल सकती है.ऐसे में भाजपा के जिला स्तरीय वरीय नेताओं की भी जिम्मेवारी बढ़ जाएगी. 

     रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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