अगले तीन सालों में कुपोषण मुक्त बनेगा झारखंड़, पलामू में की गई पहल, जानिए कैसे

    अगले तीन सालों में कुपोषण मुक्त बनेगा झारखंड़, पलामू में की गई पहल, जानिए कैसे

    पलामू (PALAMU): झारखंड राज्य में कुपोषण एक बड़ा अभिशाप बन गया है. झारखंड उन राज्यों में से एक हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग कुपोषण के शिकार पाए जाते हैं. ऐसे में पलामू जिले के लोगों को सही पोषण के प्रति जागरूक करने के लिए जिला प्रशासन ने पहल की है. इसके तहत उपायुक्त अंजनेयुलू दोड्डे ने गुरुवार को पोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. जिला समाज कल्याण विभाग की ओर से समाहरणालय परिसर से रवाना किए गए पोषण जागरूकता रथ से लोगों को कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए जागरूक किया जाएगा. मौके पर उपायुक्त ने कुपोषण मुक्त जिला के निर्माण के लिए आम जनों से सहयोग की अपील की. उन्होंने सभी विभागों को आपस में समन्वय बनाकर काम करने की बात कही ताकि इस अभियान को सफल बनाया जा सके. इस दौरान उपायुक्त की ओर से मौके पर उपस्थित सभी पदाधिकारियों और कर्मियों को जिले को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए संकल्प भी दिलाया गया.

    30 दिनों तक गांव-गांव भमण करेगा जागरूकता रथ

    मौके पर डीसी ने बताया कि पोषण माह के तहत पोषण रथ 30 दिनों तक जिले के विभिन्न प्रखंड, पंचायत और गांवों में जाकर आम जनों को जागरूक करेगा. इसके माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में होने वाले गतिविधियों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी. कहा कि इस रथ के माध्यम से लोगों को कुपोषण के प्रति,बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल,स्वस्थ गर्भावस्था के लिए आहार संबंधित आवश्यक संदेश दिया जाएगा.

    गर्भवती महिलाओं को मिलेगी खून जांच की सुविधा

    मौके पर समाज कल्याण पदाधिकारी संध्या रानी ने कहा कि एनीमिया से रोकथाम के लिए बच्चों के आयरनयुक्त पौष्टिक आहार,स्वच्छता आदि जरूरी है. सही पोषण से ही देश रौशन होगा. कहा कि इस माह विशेष रूप से स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर सभी कुपोषित बच्चों को चिन्हित किया जाएगा और उन्हें उपचार के लिए एमटीसी सेंटर रेफर किया जाएगा. इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं के खून की जांच भी की जाएगी और रक्तहीनता से पीड़ित महिलाओं को इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग रेफर किया जायेगा.

    झारखंड में कुपोषण की  स्थिति

    झारखंड उन राज्यों में से एक हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग कुपोषण के शिकार पाए जाते हैं. गर्भवती महिला से लेकर नवजात शिशु भी इस गंभीर समस्या से जुझ रहे हैं. यहां 48 प्रतिशत बच्चे कुपोषित है. जिसके उम्र के हिसाब से उनके वजन में कमी है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के रिपोर्ट की माने तो के अनुसार 0 से 6 वर्ष के बीच का हर दूसरा बच्चा कुपोषित है. इसमें गर्भवती महिला भी पिछड़ी नहीं है. गर्भवती महिला ही अगर कुपोषित होगी, तो लाजमी हैं की जन्म लेने वाला शिशु भी कुपोषित ही पैदा होगा. ऐसी स्थिति में ये समस्या बढ़ती जाती है. हालांकि सर्कार और प्रशासन इसके रोक थाम के लिए काफी गंभीर हैं. इसके तहत राज्य सरकार  कुपोषण मुक्त झारखंड बनाने को लेकर वर्ष 2021 से अभियान चला रही है. वहीं आने वाले तीन सालों में झारखंड को पूर्ण तरह से कुपोषित मुक्त बनाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है. इसको लेकर राज्यभर में कुल 96 कुपोषण उपचार केंद्र खोले गए हैं. लेकिन इन केंद्रों पर लोगों को कई तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है. किसी केंद्र में सहायक की कमी है तो कहीं डाइटिशियन ही नहीं हैं. इस स्थिति में कुपोषण को खत्म करना बड़ी चुनौती है. 

    पोषण केंद्र में मिलती हैं ये सभी सुविधा

    राज्य सरकार की ओर से संचालित पोषण केंद्रों में कुपोषितों  को मुफ्त में पोषणयुक्त आहार और दवाई मिलती  है. यहां  पोषण विशेषज्ञ यानि डाइटीशियन का मुफ्त परामर्श भी मिलता है. कुपोषण के शिकार बच्चों के लिए एक बैलेंस्ड डाइट चार्ट बना कर तैयार किया जाता है, जिसके अनुरूप ही बच्चे को आहार दिया जाता है. उपचार केंद्र में ट्रेंड नर्से ही पोषक आहार बनाती हैं.

    रिपोर्ट: ज़फर हुसैन, पलामू


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