कोयलांचल में पुलिस डाल-डाल तो रंगदार पात-पात, जानिए कैसे छद्म नाम का प्रयोग कर रंगदार कर रहे कारोबारियों और पुलिस को गुमराह!

    कोयलांचल में पुलिस डाल-डाल तो रंगदार पात-पात, जानिए कैसे छद्म नाम का प्रयोग कर रंगदार कर रहे कारोबारियों और पुलिस को गुमराह!

    धनबाद(DHANBAD) : बिहार से लेकर यूपी तक के बाहुबली कोयलांचल को रंगदारी के लिए सॉफ्ट टारगेट में रखते हैं. स्थानीय दबंग भी इस काम में पीछे नहीं है, जबकि झारखंड में सक्रिय गैंगस्टर भी रंगदारी के लिए कोयलांचल से संपर्क में रहते हैं.अभी छद्म नाम से रंगदारी मांगने का काम फिर तेज हो गया है. यह बात अलग है कि सभी का तरीका अलग और ढंग अलग है. उनके आदमी अलग हैं और प्राय सभी गिरोहों के लिए लोकल युवक काम करते हैं. यह अलग-अलग छद्म नामों से रंगदारी के लिए कारोबारियों को धमकाते है. इसके पीछे भी उनकी चतुराई होती है. वह जानते हैं कि छद्म नाम से रंगदारी वसूलने या प्रयास करने में सुरक्षित हैं. पुलिस इन नाम वालों का कभी पुलिस खुलासा नहीं कर पाती है. नतीजा होता है कि यह अपना काम करते रहते हैं. पुलिस के लिए न्यायालय में भी मुकदमा साबित करना मुश्किल हो जाता है. नतीजा है कि साक्ष्य के अभाव में सभी छूट जाते हैं.

    गैंगस्टर प्रिंस खान के मेजर के नाम से मांगी जाती है रंगदारी

    धनबाद में अभी तीन नामों की खूब चर्चा है. छोटू सिंह, मयंक सिंह का नाम तो थोड़ा धीमा पड़ गया है लेकिन अभी मेजर का नाम खूब चर्चे में है. मेजर के नाम से बेधड़क रंगदारी मांगी जा रही है. यहां तक कि पुलिस को भी सूचना देकर परेशान किया जा रहा है. जानकार बताते हैं कि वासेपुर का गैंगस्टर प्रिंस खान मेजर के नाम से लोगों से रंगदारी मांगता है. हाल के दिनों में कई घटनाएं हुई है, फोन या व्हाट्सएप कॉल कर लोगों को कहा गया है कि मैं मेजर बोल रहा हूं, तुम्हे सुरक्षित रहना है तो छोटे सरकार से बात कर लो. प्रिंस खान ने भी पूर्व में एक वीडियो जारी कर अपने को छोटे सरकार बताया था. वैसे, कोयलांचल में रंगदारी तो कोई नई बात नहीं है, केवल तरीके और ढंग बदलते रहे हैं. एक समय तो कोयलांचल में बिंदु सिंह का आतंक मचा हुआ था. लोकल लेवल पर गैंग तैयार कर लोगों से रंगदारी मांगा करता था. धनबाद के कारोबारी और डॉक्टर उसके निशाने पर थे.

    बेखौफ की गई बम बाजी

    हाल फिलहाल की बात करें तो अमन सिंह गिरोह छोटू सिंह के नाम से रंगदारी मांगता फिरता था. सुजीत सिन्हा का गिरोह मयंक सिंह के नाम का उपयोग करता है. पुलिस यह मानकर चलती है कि मयंक सिंह, छोटू सिंह अथवा मेजर  नाम के असली कोई है ही नहीं. फिर भी पुलिस को परेशानी तो होती ही है. 2 दिन पहले रात 10 बजे के बाद बैंक मोड़ पुलिस परेशान रही. पुलिस को सूचना मिली कि थाने के ठीक सामने मिट्ठू रोड में किसी दुकान पर बम बाजी की गई है. सूचना पर पुलिस सक्रिय हुई. जांच पड़ताल की गई तो यह अफवाह साबित हुई. यह सब लोगों में अपने नाम का दहशत पैदा करने के लिए किया जाता है. मटकुरिया में भी इसी तरह की घटना हुई थी. आपको बता दें कि इस तरह के गिरोह धनबाद में अपना लोकल गैंग तैयार करते हैं और उन्हीं गैंगो से जानकारी जुटाकर, फोन नंबर कलेक्ट कर लोगों से रंगदारी मांगते हैं. इस गिरोह के पास प्राय सभी लोगों का नंबर होता है, जो अपने आका को उपलब्ध कराते हैं. नंबर के साथ आका को आर्थिक हैसियत भी बताते हैं. उसके बाद रंगदारी मांगने का सिलसिला शुरू हो जाता है. कोयले के काले अथवा सफेद धंधे में अकूत कमाई के कारण भी रंगदारो को ऐसा लगता है कि धमकी देने पर उन्हें भी रकम मिल जाएगी. अभी हाल ही में आउटसोर्सिंग के लाइजनिंग ऑफिसर सतीश सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. यह लाइजनिंग ऑफिसर दबंग होते हैं और आउटसोर्सिंग कंपनियों के लिए काम करते हैं. आउटसोर्सिंग कंपनियों को कोई परेशानी नहीं हो इसके लिए हरेक कंपनियां किसी ना किसी को अपना मुखौटा बना कर रखती हैं.

    रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह, धनबाद


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