दुमका: अवैध खनन के मामले में प्रशासन मौन, अब ग्रामीणों ने उठाया अवैध खनन रोकने का बीड़ा

    दुमका: अवैध खनन के मामले में प्रशासन मौन, अब ग्रामीणों ने उठाया अवैध खनन रोकने का बीड़ा

    दुमका(DUMKA):अवैध कार्य को रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन दुमका में अगर यह काम आम आदमी करने लगे तो आप क्या कहेंगे. या तो जिले में माफिया राज कायम है या फिर प्रसासन की सहमति से रात के अंधेरे में अवैध कार्य जारी है. दरअसल शनिवार की रात दुमका जिला के जरमुंडी प्रखंड के खुटहरी के ग्रामीणों ने मोतिहारा नदी से पोकलेन की मदद से बालू का उठाव कर परिवहन कर रहे एमकेएस कंस्ट्रक्शन कंपनी के कर्मी को रोक दिया.  कंस्ट्रक्शन कंपनी के कर्मी ने जब ग्रामीणों पर धौस जमाना शुरू किया तो इसकी जानकारी जरमुंडी थाना पुलिस को दी गयी.  जब तक पुलिस पहुंचती उसके पहले ही कर्मी ने हाइवा में लोड बालू को नदी में ही अनलोड कर दिया. 

    पुलिस मौके पर पहुचीं.  एक पोकलेन और एक हाइवा को जप्त कर थाना ले आयी.  ग्रामीण विनय कुमार बताते है कि पहले ट्रेक्टर से बालू का उठाव किया जाता था. उस वक्त बताया गया कि सड़क निर्माण कार्य के लिए बालू का उठाव किया जा रहा है.  लेकिन जब पोकलेन और हाइवा लगने लगा तो ग्रामीणों को शक हुई.  ग्रामीण कंस्ट्रक्शन कंपनी पर अवैध तरीके से बालू का उत्खनन कर उसका परिवहन किया जा रहा.  गांव के लोग क्षेत्र में पेयजल संकट की कल्पना कर सिहर उठे और एकता का परिचय देते हुए पंचायत के मुखिया पति के साथ मिलकर गलत का विरोध करने का निर्णय लिया. नतीजा पोकलेन और हाइवा जप्त हो गया. 

    सड़क निर्माण के नाम से बालू को बेचा जा रहा 

    ग्रामीण विनय कुमार बताते हैं कि पहले बालू की ढुलाई ट्रैक्टर से किया करते थे लेकिन अब पोकलेन और हाईवा की मदद से बालू को उठाया जा रहा है. सड़क निर्माण के नाम से बालू को दूसरे जगह ले जाकर बेचने का काम कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा किया जा रहा है. वहीं कंस्ट्रक्शन कंपनी के कर्मी का कहना है कि नदी में पूल निर्माण का कार्य चल रहा है. पूल का पिलर निर्माण के लिए बालू का उत्खनन किया जा रहे.  लेकिन सवाल है कि पिलर निर्माण स्थल से लगभग 200 मीटर दूर बालू का उत्खनन क्यों? उनका यह भी कहना है कि इसी कंपनी द्वारा सड़क निर्माण का कार्य किया जा रहा है. सड़क पर बालू बिछाने के लिए परिवहन किया जाता है. 

    हाइवा से रात में बालू की ढोलाई 

    कंस्ट्रक्शन कंपनी के कर्मी चाहे जो दलील दें, लेकिन सवाल उठता है कि किसकी अनुमति से रात के अंधेरे में नदी में पोकलेन और हाइवा लगाकर बालू का उत्खनन और परिवहन हो रहा है। क्या सरकार को इस बालू का रॉयल्टी मिला या नहीं? कंपनी अगर सड़क निर्माण करा रही है तो उसके लिए एस्टीमेट भी बना होगा जिसमें सड़क निर्माण सामग्री की खरीददारी करने का नियम है? ऐसे बहुत से सवाल है जिसका जबाब तभी मिल पायेगा जब प्रसासन पूरे मामले की गहनता से जांच करे. कृषि मंत्री बादल पत्रलेख के विधानसभा क्षेत्र में ग्रामीणों ने वो कर दिखाया जो प्रसासन को करनी चाहिए थी.  अब प्रसासन क्या कदम उठाती है यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा. 

    रिपोर्ट:पंचम झा  


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