कितने रेल मंत्री बदल गए, कई सांसद भूतपूर्व हो गए लेकिन पढ़िए धनबाद को क्यों नहीं मिली दिल्ली की सीधी ट्रेन?

    कितने रेल मंत्री बदल गए, कई सांसद भूतपूर्व हो गए लेकिन पढ़िए धनबाद को क्यों नहीं मिली दिल्ली की सीधी ट्रेन?

    धनबाद(DHANBAD):   कई रेल मंत्री बदल गए , कितने सांसद भूतपूर्व हो गए, कितने महाप्रबंधक बदल गए, मंडल रेल प्रबंधक भी कई आए और चले गए.  लेकिन धनबाद को नई दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन नहीं मिली.  पता नहीं कितनी रेल सलाहकार समिति की बैठक में यह मांग  उठी, लेकिन कुछ भी नहीं हुआ.  मंगलवार को भी धनबाद रेल संसदीय समिति की बैठक हुई.  इस बैठक में गिरिडीह, पलामू और चतरा  के सांसद स्वयं मौजूद थे.  बाकि  पांच सांसदों और सात  राज्यसभा सांसदों के प्रतिनिधि मौजूद थे.  एक बार फिर दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन की मांग जोरदार ढंग से उठी.   

    फिर एक बार सीधी ट्रेन  की उठी है मांग 

    मंडल संसदीय समिति की बैठक में पहुंचे सांसद और उनके प्रतिनिधियों ने धनबाद स्टेशन से नई दिल्ली ,मुंबई और बेंगलुरु स्टेशनों के लिए नियमित ट्रेन चलाने की मांग की.  हालांकि पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक ने सांसदों के प्रस्ताव पर पॉजिटिव विचार करने का आश्वासन दिया.  सभी सांसदों ने अपने-अपने इलाके के लिए प्रस्ताव दिए है.  धनबाद से नई दिल्ली ,मुंबई और बेंगलुरु स्टेशनों के लिए सीधी ट्रेन की मांग कोई नई मांग नहीं है.  यह  बहुत पुरानी मांग है.  यह भी सच है कि धनबाद रेल मंडल राजस्व के मामले में भारतीय रेल का सिरमौर है.  लेकिन सुविधा के नाम पर धनबाद अब तक छला  जाता रहा है.  कभी यह कहकर मांगों को दरकिनार कर दिया जाता है कि धनबाद रेल मंडल लोडिंग स्टेशन है.  इसलिए यहां से यात्री ट्रेन देना संभव नहीं है.  अगल-बगल के स्टेशनों से ट्रेन दी जाती है. 

    सवाल यह भी है कि रेल मैनेजमेंट साफ़ -साफ़ क्यों नहीं कुछ कहता 

     अगर बात यह सच है तो मंडल संसदीय समिति की बैठक में सांसदों के सामने रेल मैनेजमेंट स्पष्ट क्यों नहीं करता? यह सवाल अब बड़ा हो चला है. बता दे कि   हावड़ा- नई दिल्ली रेल लाइन को बने 100 साल से भी अधिक हो गए.  लेकिन धनबाद को अब तक नई दिल्ली के लिए भी ट्रेन नहीं मिली है.  यह  स्थिति तब है, जब धनबाद रेलवे का सबसे कमाऊ पुत्र है.  सीधी ट्रेन की मांग करते-करते कई सांसद अब पूर्व सांसद हो गए.  कई रेल अधिकारी रिटायर कर गए, लेकिन मांग पूरी नहीं हुई.  रेलवे कभी यह आकलन करने का प्रयास नहीं करता है कि धनबाद से रेल यात्रियों से कितना राजस्व रेलवे को मिलता है. पूरे देश के आकड़े पर बात की जाए तो करीब 2 करोड़ 40 लाख लोग रोजाना ट्रेन से सफर करते हैं. भारतीय रेल दुनिया का चौथा सबसे विशाल रेलवे नेटवर्क है. भारत में हर दिन लगभग 22,593 ट्रेनें संचालित होती हैं. 

    3,452 यात्री ट्रेनें देश में 7,325 स्टेशनों से गुजरती है 

    इनमें 13,452 यात्री ट्रेनें हैं, जो करीब 7,325 स्टेशनों को कवर करती हैं.  ट्रेनों की इस संख्या में मेल, एक्सप्रेस और पैसेंजर सभी तरह की ट्रेनें शामिल हैं.इसके अलावा, भारतीय रेलवे माल ढुलाई के लिए हर दिन 9141 ट्रेनें चलाता है. जिसके जरिए देश के कोने-कोने तक जरूरी सामानों की आपूर्ति की जाती है. रेलवे रोजाना लगभग 20.38 करोड़ टन माल ढोता है. वहीं, मालगाड़ी और यात्री रेलगाड़ियाँ मिलकर प्रतिदिन लगभग 67,368 किलोमीटर की दूरी तय करती हैं. यहाँ यह कहना भी गलत नहीं होगा कि धनबाद से दिल्ली के लिए हर दिन सैकड़ों लोग रेल मार्ग से यात्रा करते हैं, पर धनबाद से दिल्ली के लिए कोई ट्रेन नहीं खुलती. लोगों को हावड़ा और सियालदह से आने वाली ट्रेनों पर ही आश्रित रहना पड़ता है.  धनबाद से दिल्ली के लिए ट्रेन की मांग 20 वर्षों से लगातार की जा रही है. इसपर रेलवे ने कभी ध्यान तक नहीं दिया.  नतीजा धनबाद को आज तक दिल्ली के लिए ट्रेन नहीं मिल सकी.देखना दिलचस्प होगा कि अब आगे -आगे होता है क्या --?

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  


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