मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने  केंद्र के बहाने कोल इंडिया पर कैसे बढ़ाया दवाब, पढ़िए विस्तार से !

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने  केंद्र के बहाने कोल इंडिया पर कैसे बढ़ाया दवाब, पढ़िए विस्तार से !

    धनबाद (DHANBAD) :  झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन केंद्र सरकार के बहाने कोल इंडिया प्रबंधन पर दबाव बढ़ा दिया है. झारखंड राज्य बिजली बोर्ड के साथ डीवीसी के बकाया मामले को उदाहरण के रूप में रखकर कोल इंडिया से सिर्फ ब्याज के तौर पर 1100 करोड़ रुपए प्रति महीने की मांग कर डाली है. मुख्यमंत्री ने 1.36 लाख करोड रुपए की मांग केंद्र सरकार से की है. कहा है कि जब तक बकाए का भुगतान किस्तों में नहीं हो जाता, कोल इंडिया और उसकी सहायक कंपनियां से ब्याज का भुगतान कराया जाए. रिजर्व बैंक में कोल इंडिया के खाते में जमा राशि से झारखंड को सीधे डेबिट कराया जाए. उन्होंने यह भी लिखा है कि बकाए का भुगतान जल्द होने से राज्य सरकार सामाजिक, आर्थिक परियोजनाओं की संख्या को और गति दे सकेगी. 

    खनन रॉयल्टी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला
     
    पत्र में खनन रॉयल्टी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया गया है. मुख्यमंत्री ने लिखा है कि अगर कानून हमें राजस्व एकत्र करने की अनुमति देता है, तो इसे राज्य को भुगतान किया जाना चाहिए. कोल कंपनियों पर बकाया पर 4.5 फ़ीसदी के ब्याज की गणना करने पर यह  510 करोड़ प्रति महीने होता है. यदि डीवीसी बकाया के संबंध में झारखंड से वसूले गए ब्याज के मामले  को  आधार बनाया  जाए तो ब्याज 1100 करोड़ प्रति महीने हो जाता है. कोल इंडिया की अनुषंगी इकाइयों से सबसे अधिक उत्पादन झारखंड से होता है.  

    झारखंड में कई कोल कंपनियां करती है काम 

    झारखंड में BCCL, CCL, सीएमपीडीआईएल के अलावा ईसीएल की तीन एरिया राजमहल, चितरा और मुगमा झारखंड में है. झारखंड में कोयलाकर्मियों की संख्या लगभग 70 हजार है. फिलहाल झारखंड में चुनाव होने वाले है. आरोप-प्रत्यारोप और डिमांड का दौर जारी है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दावा किया है कि हम ऐसी नीति बनाएंगे कि राज्य की संपूर्ण खनिज संपदा का स्थानीय लोग हिसाब रखेंगे. इसके बाद ही उसे बाहर भेजा जाएगा. सीएम ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अडानी को खदान मिल गया. वहां के जंगलों को उजाड़ा जा रहा है. आदिवासियों को बेदखल करने की तैयारी है. भाजपा के लोग जंगल उजाड़ने में मदद कर रहे है. अगर जंगल उजड़ गया तो आदिवासी खत्म हो जाएंगे. आदिवासियों की जगह व्यापारियों को बैठाने  की भाजपा तैयारी कर रही है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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