Hemant Soren Part -2 : कैसे पकड़ेगी विकास की रफ़्तार, पढ़िए कितने  बोर्ड, निगम और आयोग के पद है खाली !

    Hemant Soren Part -2 : कैसे पकड़ेगी विकास की रफ़्तार, पढ़िए कितने  बोर्ड, निगम और आयोग के पद है खाली !

    धनबाद(DHANBAD): झारखंड में हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल पार्ट-2 को शपथ लिए हुए भी 7 महीने से अधिक हो गए, लेकिन विकास को गति देने वाले पहिए अभी भी ठप पड़े हुए हैं. इसकी प्रतीक्षा सिर्फ झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता और कार्यकर्ता ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि गठबंधन के तमाम नेता भी कर रहे हैं .इंतजार कर रहे हैं कि हो सकता है कि उन्हें भी कोई बोर्ड, निगम या आयोग का पदाधिकारी बना दिया जाए. लेकिन सरकारी स्तर पर अभी कोई सुगबुगाहट नहीं दिख रही है. राज्य सरकार के विकास को गति देने के लिए बोर्ड, निगम और समितियां होती है. इन्हीं के भरोसे सरकारी योजनाएं जमीन पर उतरती है. लेकिन कई ऐसी समितियां हैं, कई बोर्ड है, जिनका गठन नहीं हुआ है. 

    झारखंड में कुल 56 बोर्ड, निगम, आयोग और समितियां हैं

    एक आंकड़े के मुताबिक झारखंड में कुल 56 बोर्ड, निगम, आयोग और समितियां हैं. केवल 11 का ही गठन हो सका है. 44 कई वर्षों से रिक्त है. इनमें महिला आयोग, सूचना आयोग, बोर्ड, निगम शामिल है. झारखंड में निकाय चुनाव को लेकर भी सरकार की किरकिरी हो रही है. निकाय चुनाव नहीं होने से सारी व्यवस्था सरकार के अधीन है. जनप्रतिनिधि भी परेशान है. अभी धनबाद आए नगर विकास मंत्री ने संकेत दिए हैं कि बहुत जल्द ही आप लोग अपने शहर, वार्ड के प्रतिनिधि को देख सकेंगे. मतलब निकाय चुनाव की सुगबुगाहट तेज होने जा रही है. हालांकि झारखंड में निकाय चुनाव नहीं होने से सरकार को भी नुकसान है. केंद्र सरकार ने कई जिलों के लिए आर्थिक पैकेज को रोक दिया है. कहा है कि जब तक निकाय चुनाव नहीं होते, तब तक राशि आवंटित नहीं की जाएगी. 

    वार्ड पार्षदो को भी कम नहीं है परेशानी 

    खैर, सबसे बड़ी समस्या है कि वार्ड पार्षद भूतपूर्व हो गए हैं. लेकिन लोग अभी भी अपने छोटे-मोटे कामों के लिए उन तक पहुंचते हैं .उनकी परेशानी है कि वह इन परेशानियों को दूर नहीं करा पाते. नतीजा है कि कभी-कभी उन्हें लोगों के गुस्से का भी सामना करना पड़ता है. झारखंड में अभी गठबंधन की सरकार है. इस गठबंधन में झामुमो, कांग्रेस और राजद शामिल है. इन दलों के विधायकों तक उम्मीद है कि उन्हें मंत्री पद नहीं मिला है, तो कोई ना कोई बोर्ड निगम या आयोग में अध्यक्ष का पद उन्हें मिल सकता है. लेकिन सरकार की शिथिलता की वजह से उनमें निराशा भी है. झारखंड में कई महत्वपूर्ण बोर्ड, आयोग और समितियां के पद खाली हैं. राज्य महिला आयोग तक का गठन नहीं हुआ है.

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 


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