PESA कानून लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही हेमंत सरकार, जानिए क्या है ताजा समाचार


रांची(RANCHI): राज्य की हेमंत सरकार लगभग 4 साल पूरा करने जा रही है. इस 4 साल के कार्यकाल में यह सरकार कुछ ना कुछ खास करने का प्रयास की है. भले वह अमल में आया हो या नहीं, लेकिन एक मैसेज देने का जरूर प्रयास हुआ है. झारखंड की एक पुरानी मांग रही है कि यहां पेसा कानून लागू किया जाए.
क्या है पेसा कानून जानिए इसके बारे में
पेसा कानून 1996 में बनाया गया. इसका मतलब है कि पंचायत स्तर पर उन क्षेत्रों को विशेष रूप से कानून के दायरे में लाया जाए जहां जनजातीय आबादी रहती है. दरअसल यह संविधान की पांचवी अनुसूची के अधीन आने वाले राज्यों में लागू होता है. पंचायती राज व्यवस्था को लागू करने के लिए स्वतंत्रता के बाद से ही कई कमेटियों ने अनुशंसा की थी. प्रमुख रूप से बलवंत राय मेहता के नेतृत्व में बनी कमेटी ने पंचायत को अधिकार रेखांकित किए थे.
पंचायती राज व्यवस्था में क्या कुछ होता है खास
पेसा कानून यानी पंचायत एक्सटेंशन तो शेड्यूल एरिया कानून. इसके तहत जनजातीय बहुल क्षेत्र में ग्राम सभा को बहुत सारे अधिकार मिलते हैं जिसके माध्यम से स्थानीय स्वशासन व्यवस्था का संचालन होता है. इस व्यवस्था के तहत आदिवासी समुदाय की परंपराओं को अक्षुण रखने के लिए काम करने के अधिकार ग्राम सभाओं को मिलते हैं.
झारखंड में क्या हो रहा है अभी
1996 में बने पेसा कानून को लागू करने के लिए बयान बाजी खूब होती रही है. हाल में कांग्रेस ने भी सरकार पर दबाव बनाया है जबकि वह खुद इसमें साझेदारी है. हाल ही में कांग्रेस ने इसको लेकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद की है. अब कहीं जाकर सरकार पर भी एक तरह से दबाव बढ़ गया है. इसलिए इसे लागू करने की दिशा में कदम आगे बढ़ाए गए हैं. ग्रामीण एवं पंचायती राज विभाग के मंत्री आलमगीर आलम ने पेसा कानून लागू करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी है. अब कैबिनेट में इस पर चर्चा होगी और अगर इस पर मोहर लगती है तो फिर इससे संबंधित विधेयक शीतकालीन सत्र में आ सकता है.
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