LOHARDAGA: नदी, तालाब, कुएं सूखे- अब बारिश के इंतजार में किसान बिचड़े को बचाने का कर रहे हर संभव प्रयास
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लोहरदगा (LOHARDAGA) : जिन खेतों में अब तक धान लहलहाने चाहिए वहां अभी तक जुताई भी नहीं हुई है. किसान नदी और तालाब से किसी तरह पानी अपने खेतों में लाकर धानरोपनी करते रहे हैं. लेकिन तालाब, कुआ और नदी भी तो लगभग सूख चुके हैं. जहां कल तक जल का प्रलय दिखता था, वहां आज सूखा पड़ा हुआ है. ऐसे में इन किसान बिचड़ा बचाने के लिए पंप के माध्यम से खेतों तक पानी ला रहे है. ताकि शुरुआती समस्या दूर हो जाए, लेकिन जिला की 85 प्रतिशत भूमि अब भी बारिश का इंतजार कर रही है. ताकि इन बेजान पड़े खेतों में जान लौट सके. इन किसानों के सामने खेतों के अस्तित्व को बचाने को लेकर संघर्ष जारी है. ताकि इनके घरों के साथ साथ देश के थाली में अन्न पहुंच सकें. किसानों का कहना है कि इनके सामने धान का बिचड़ा को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करना पड़ेगा.
पलायन की स्थिति, मंत्री ने दिया आश्वासन
लोहरदगा के इन सूखे खेतों को देख किसानों के सामने पलायन जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगी है. भूख के चंद दानों के लिए इन्हें मेघा का इंतजार करना पड़ रहा है वही दूसरी ओर झारखंड सरकार के मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव का कहना है कि राज्य में सूखा की स्थिति होने पर आपदा प्रबंधन के नियमों के अनुरूप किसानों को लाभ पहुंचाने की दिशा में कार्य किया जाएगा.
राज्य सरकार से आस
लोहरदगा जिला के खेतों में लगे धान के बिचड़े को बचाने की जद्दोजहद जारी है. खेतों में चंद घंटे पहले लगे धान की जमीं अब प्यासी हो गई है और जल के लिए अपना गला फाड़ मेघ के बरसने का इंतजार पल पल हर पल कर रही है. अब देखना है कि राज्य सरकार सुखा की स्थिति पर क्या निर्णय लेती है.
रिपोर्ट: गौतम लेनिन, लोहरदगा
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