श्रावणी मेला के समापन पर पूर्व संध्या भव्य आरती का आयोजन, वाराणसी जैसा दिखा नजारा

    श्रावणी मेला के समापन पर पूर्व संध्या भव्य आरती का आयोजन, वाराणसी जैसा दिखा नजारा

    दुमका (DUMKA) : शंखनाद, घंटी, डमरू की आवाज और मां गंगा के जयकारे के बीच आसमान की बुलंदियों को छूने को बेताब दीपक की लौ, यह नजारा देख कर शायद आप भी यही सोच रहे होंगे कि गंगा आरती का यह नजारा वाराणसी के दशाश्वमेध घाट का है. लेकिन यह नजारा दशाश्वमेध घाट का नहीं बल्कि दुमका के पवित्र तीर्थ स्थल बासुकीनाथ धाम स्थित शिवगंगा तट का है. सावन पूर्णिमा के प्रवेश काल और श्रावणी मेला के समापन की पूर्व संध्या के समय ये भव्य आरती की जा रही है. श्रद्धालुओं का शैलाब दशाश्वमेध घाट पर भक्ति भाव मे लीन हो गया था.

    श्रावणी मेला के समापन की पूर्व आरती का आयोजन

    कुछ वर्षों से बासुकीनाथ धाम में जिला प्रशासन द्वारा शिव गंगा तट पर महाआरती का आयोजन शुरू किया गया है. इस बर्ष सावन की पूर्णिमा के प्रवेश और श्रावणी मेला के समापन की पूर्व संध्या पर इसका आयोजन किया गया. इसके लिए बाबा नगरी बनारस से काशी गंगा आरती की टोली को बासुकीनाथ बुलाया गया. डीसी ए दोड्डे यजमान बने। आचार्य मोहित उपाध्याय के नेतृत्व में काशी गंगा आरती के तीर्थ पुरोहितों की टोली ने बैदिक मंत्रोचार के बीच शिवगंगा आरती सम्पन्न कराया. मौके पर एसपी पीताम्बर सिंह खेरवार, एसडीओ कौशल कुमार सहित तमाम पदाधिकारी मौजूद थे.

    फौजदारी बाबा पर जलार्पण

    इसे देखने काफी संख्या में शिव भक्त पहुचे थे. प्रसासनिक स्तर से लाइव टेलिकास्ट के साथ साथ फौजदारी बाबा पर जलार्पण के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए रूट लाइन में स्क्रीन लगाया गया था। शिवगंगा तट की बेहतर सफाई के साथ साथ आकर्षक सज्जा की गई थी.

    काशी गंगा आरती के तीर्थ पुरोहित आचार्य मोहित उपाध्याय ने कहा कि काशी हो या बासुकीनाथ, दोनों बाबा भोलेनाथ की नगरी है. जिस तरह काशी में लोगों का स्नेह मिलता है वैसा ही स्नेह यहां पर भी देखने को मिला.

    जानिए क्या है महत्व

    गंगा आरती का अपना एक विशेष धार्मिक महत्व है. कहा जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है. कुछ वर्ष पूर्व शुरू हुए बासुकीनाथ धाम स्थित शिवगंगा तट पर गंगा आरती की प्रसिद्धि चारों तरफ फैलने लगी है. यही वजह है कि इसका दीदार करने दूर दराज से भी लोग पहुँचते है. सच पूछा जाए तो भक्तिपूर्ण माहौल देख कर एक पल के लिए ऐसा लगता है मानो देवलोक में हों.

    रिपोर्ट: पंचम झा/सुतिब्रो गोस्वामी  


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