उफान पर गंगा, खतरे में लोगों की जान! साहिबगंज में तीन दिन से हो रही है आफत की बारिश,बाढ़ के खतरे के बीच भूखे मरने को मजबूर है लोग

    उफान पर गंगा, खतरे में लोगों की जान! साहिबगंज में तीन दिन से हो रही है आफत की बारिश,बाढ़ के खतरे के बीच भूखे मरने को मजबूर है लोग

    साहिबगंज(SAHIBGANJ):साहिबगंज जिले में अगले तीन दिनों से आफत की बारिश हो रही है.लगातार हो रही बारिश लोगों के लिए जी का जंजाल बन गयी है तो वहीं उफान मारती गंगा नदी का रौद्ररूप को देखकर बाढ़ प्रभावित इलाकों में बसने वाले करीब पच्चास हजार से ज्यादा आबादी दहशत में है.उफान मारती गंगा नदी को देख आफत में लोगों की जान है,और गंगा नदी की बढ़ता जलस्तर देखकर बाढञ का खतरा मडरा रहा है.

    भूखे मरने को मजबूर है लोग

    वहीं लगातार बढ़ती गंगा नदी में बाढ़ के खतरे को देखते हुए बाढ़ प्रभावित इलाकों में बसे करीब बीस गाँव के पच्चास हजार से ज्यादा लोग  किसी तरह अपने घर के छतों पर प्लास्टिक का तम्बू बनाकर अपना जीवन यापन कर रहे है आलम यह है कि बाढ़ पीड़ित लोगो के पास जो खाने अनाज पहले से था,अब वह खत्म हो चुका है,तो किसी का पानी में भीगकर खराब हो गया है,लोगों को जिंदा रहने के सोचना पड़ रहा है.कई घरों के लोग तो कई दिनों से भूखे पेट है तो कई घरों के लोग चूड़ा और सत्तू खाकर अपना जीवन यापन कर रहे है.बाढ़ पीड़ित ने बताया कि पशुपालक क्षेत्र के विभिन्न सूखे इलाके से चारा की व्यवस्था कर रहे हैं,जबकि जिला प्रशासन की ओर से मवेशियों के लिए चारा की व्यवस्था नहीं की गयी है,जिसके कारण पशुओं के हालात भी बिगड़ती जा रही है.

    बीजेपी विधायक ने बढ़ाया मदद का हाथ

    वहीं केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक गंगा नदी के जलस्तर 26.30 सेमी दर्ज किया गया है, जो खतरे के निशान से ऊपर है.वहीं बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की बिगड़ती हालात को देखते हुए बीजेपी ने अपने कदम को आगे बढ़ाया है. जिला उपाध्यक्ष राजेश मंडल ने गदाई दियारह के 10 गांवों में पहुँचकर बाढ़ पीड़ित परिवारों को तीन किलो चूड़ा और आधा किलो गुड़ सहित कई अन्य राहत सामग्री का वितरण किया तो वही दुसरी तरफ राजमहल के बीजेपी विधायक अंनत ओझा ने भी कारगिल दियारह,किसन प्रसाद दियारह सहित कई अन्य बाढ़ गांवों में पहुँचकर राहत सामग्री का वितरण किया,और हर संभव उनके साथ खड़ा होने का भरोसा दिलाया है.वहीं पीड़ित ग्रामीणों ने विधायक अंनत ओझा के बीच साझा किया कि दियारा क्षेत्र के तीन हजार बीघा खेतों में लगी केलाई, बैगन, मूली,टमाटर अन्य फसल पानी मे डूबकर बर्बाद हो गया है.जबकि बर्बाद हुए फसलों का आया एक-दो महीना के बाद में ही दो करोड़ की होती है.पर अचानक गंगा की जलस्तर में वृद्धि होने से बाढ़ से सब बर्बाद हो गये हैं.

    रिपोर्ट-गोविंद ठाकुर


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