मैथन डैम में फ्लोटिंग सोलर पैनल से होगा बिजली उत्पादन, जानिए क्या है पूरी योजना

    मैथन डैम में फ्लोटिंग सोलर पैनल से होगा बिजली उत्पादन, जानिए क्या है पूरी योजना

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद के मैथन डैम में फ्लोटिंग सोलर पैनल से बिजली उत्पादन जनवरी महीने से संभवत शुरू हो जाएगा. अब तक की योजना के मुताबिक यह बिजली मुंबई की कंपनी को जाएगी. इसके लिए डीवीसी और कंपनी के बीच एकरारनामा हो गया है. डीवीसी के अधिकारियों के अनुसार एक बार सोलर फ्लोटिंग पैनल लग जाने के बाद कम से कम ढाई दशक तक यह काम करता रहेगा. डैम से जलापूर्ति, सिंचाई, मछली पालन के साथ-साथ पहले से ही बिजली का उत्पादन किया जा रहा है. सोलर पैनल से पहले चरण में 25 से 30 मेगा वाट बिजली का उत्पादन कर नजदीकी ग्रिडों को देने की तैयारी की जा रही है. योजना के मुताबिक डैम के 10 फ़ीसदी हिस्से में फ्लोटिंग पैनल लगाया जाएगा.

    पानी के घटने-बढ़ने पर भी कोई असर नहीं होगा

    इसमें विशेष बात यह होगी कि डैम में पानी के घटने-बढ़ने के स्तर के हिसाब से यह पैनल खुद अपनी जगह बनाकर बिजली का उत्पादन करता रहेगा. पानी के बीचो-बीच होने की वजह से जमीन पर लगने वाले प्लांट की तुलना में इसके पैनल पर कम धूल जमेगी. पानी के बीच रहने के कारण सोलर पैनल ठंडा भी रहेगा. इस पैनल से मछली पालन के काम में कोई परेशानी नहीं आएगी. सूत्र यह भी बताते हैं कि बिजली खरीद मामले में अंतिम मुहर झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग को लगाना है. आयोग ही बिजली खरीद की दर तय करेगा, इसको लेकर 22 नवंबर को सुनवाई की तिथि निर्धारित की गई है. आपको बता दें कि मैथन पर ही धनबाद की जलापूर्ति निर्भर करती है. हालांकि इस सोलर पैनल के लग जाने से जलापूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ने का दावा किया गया है.

    मैथन से ही पानी पहुंचता है धनबाद

    मैथन से ही पानी धनबाद पहुंचता है और उसके बाद शहर के कम से कम 19 जल मीनारों में पानी की आपूर्ति होती है. अभी हाल ही में डीबीसी द्वारा फ्लो मीटर लगाने को लेकर 5 दिनों तक धनबाद शहर की जलापूर्ति ठप हुई थी तो कोहराम मच गया था. लोग बूंद-बूंद पानी को तरस गए थे. इसको लेकर डीबीसी और धनबाद के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में ठन गई है. इसके बाद निगम ने भी पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को नोटिस देकर पूछा है कि किसके आदेश से 5 दिनों तक जलापूर्ति ठप कर फ्लो मीटर लगाने का निर्णय लिया गया था. भविष्य में जलापूर्ति ठप करनी हो तो बैठक कर उसके वैकल्पिक व्यवस्था होने पर ही पानी की आपूर्ति ठप की जा सकती है.

    रिपोर्ट : सत्यभूषण सिंह, धनबाद


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