पहले फर्जी तरीके से जमीन बेचा जब विरोध किया तो कर डाला एससी एसटी का केस, भुक्त भोगी लगा रहे गुहार  

    पहले फर्जी तरीके से जमीन बेचा जब विरोध किया तो कर डाला एससी एसटी का केस, भुक्त भोगी लगा रहे गुहार  

    रांची(RANCHI): झारखंड में रसुखदारों की एक बड़ी फौज है,जो किसी भी जमीन या प्रॉपर्टी पर पुलिस के साथ मिल कर कब्जा कर लेता है.जब इसकी शिकायत किसी अधिकारी के पास करेंगे तो अधिकारी उल्टा आप पर ही केस कर फंसा सकते है. ऐसा लग रहा है कि झारखंड में कानून नाम की कोई चीज ही नहीं बची हो. थाने में बैठे थानेदार से लेकर पुलिस प्रशासनिक के बड़े अधिकारी किसी एक आदमी के इशारे पर काम करने लगे तो फिर उस इलाके और जिले का क्या होगा यह भगवान ही जाने.कुछ ऐसा ही मामला कांके थाना क्षेत्र दर्ज हुआ है.एक व्यक्ति ने दिल्ली से आकार रांची के कांके में जमीन की खरीद की बाद में जब वह दिल्ली चले गए तो फिर उस जमीन को बिक्री कर उनके घर को बुलडोजर से तोड़ दिया गया. 

    इस मामले में एक पंकज सिंह का नाम खूब सुर्खियों है. अब पंकज सिंह का रसूख इतना कैसे है यह तो अंदाज लगाना मुश्किल है. बताया जाता है कि इनकी  पहुंच काफी उपर तक है. इस मामले में 23 मई को ईडी के पास भी एक शिकायत की गई थी.इस शिकायत के दर्ज होने के बाद पंकज सिंह पर कार्रवाई नहीं की गई बल्कि अमल कुमार नाम के जमीन मालिक को पहले डराया धमकाया गया.जब यह अड़े रहे तो उल्टा अमल पर ही एससी एसटी के मामले में केस कर दिया गया.केस के बाद भी अमल डरे नहीं है. The News Post से बात करते हुए कहा कि उन्हे फोन कर धमकी दी जाती है. 

    एससी एसटी केस होने के बाद अब डीआईजी और अन्य बड़े पुलिस अधिकारी के साथ साथ cmo और pmo में शिकायत दर्ज करा कर न्याय की मांग कर रहे है. लेकिन कहीं से भी कोई आश्वासन नहीं मिला है. जिस तरह से जमीन कब्जे का खेल रांची में चल रहा है ऐसे में जमीन लेने से पहले कोई भी हजार बार सोचेगा. ऐसा सिर्फ अमल के साथ नहीं हुआ है जब जांच होगी तो सैकड़ों ऐसे मामले सामने आ सकते है. लेकिन कोई भी अधिकारी ऐसे मामले में कोई कार्रवाई नहीं करता है.

    अमल ने बताया कि जमीन की फर्जी तरीके से बिक्री की गई है.जो केवाला (डीड) बनाया गया है वह पूरी तरह से फर्जी है. जिस नाम का जिक्र है उस नाम का कोई आदमी ही नहीं है इससे साफ है कि जो दस्तावेज दिखा कर झूठी रजिस्ट्री कराई गई है यह कैसे हुई होगी. जिस नाम से आदमी से जमीन की खरीदारी दिखाई है पूरे रांची में कोई नहीं है. लेकिन अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज के जरिए जमीन की रजिस्ट्री की बाद में मोटेशन भी करा दिया गया. जब कि जो जमीन के असली मालिक है उनके मोटेशन के आवेदन को पेंडिग रख दिया गया.


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