गढ़वा में फैला जोड़े बाघ का दहशत, वन विभाग को मिले नर और मादा बाघ के फुटमार्ग, पढ़ें क्या कह रहा है वन विभाग

    गढ़वा में फैला जोड़े बाघ का दहशत, वन विभाग को मिले नर और मादा बाघ के फुटमार्ग, पढ़ें क्या कह रहा है वन विभाग

    गढ़वा(GADHWA): गढ़वा जिले में इन दिनों जंगली जानवरों का आतंक देखने को मिल रहा है. जहां हाथी,भालू, तेंदुवा और लकड़बघा के आतंक के बाद अब बाघ के जोड़े से लोगों में डर का माहौल व्याप्त है. पिछले एक सप्ताह से जिले के रंका, रमकंडा,भंडरिया के इलाके मे बाघ के जोड़े ने लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल कर दिया है. इसके डर से ग्रामीण घर मे दुबक गए है. वहीं बाघ के जोड़े ने अबतक नौ पशुओं पर हमला कर दहशत फैला दिया है. वन विभाग को दो बाघ के फुटमार्ग और उनके मल मिले है.

    वन विभाग को मिले नर और मादा बाघ के फुटमार्ग

    जानकारी मिलते ही डीएफओ ने एक टीम बनाकर होमियों गांव के बलिगढ़ जंगल के छोटका पहाड़ और बड़का पहाड़ पर गई. जहां टीम ने सबसे पहले पुरे इलाके मे ट्रेपिंग कैमरा लगाया, उसके बाद बाघ के फुटमार्ग लेने के लिए जंगल मे निकल गई. गांव से लगभग पांच किलोमीटर अंदर जाने के बाद बाघ के फुटमार्ग वन कर्मियों को मिले. जो फुटमार्ग कर्मियों को मिले ये दो बाघ के थे, जिसमे एक नर और दूसरा मादा बाघ का है. महज 24 घंटे पहले इसी नाले को पार करते हुए बाघ निकले. वन कर्मियों ने तुरंत बाघ के फुटमार्ग कलेक्ट किए.

    लोगों को जंगल पर लगी पाबंदी

    वहीं इसके बाद वन विभाग ने गांव के लोगों को सावधान रहने की चेतावनी दी है. वहीं पालतू पशुओं को जंगल मे नहीं ले जाने का भी निर्देश दिया है. माइकिंग करते हुए वन विभाग की जागरूकता गाड़ी से लोगों को सतर्क किया जा रहा है.जिसमे बताया जा रहा है कि पिछले तीन दिनों से रमकंडा वन क्षेत्र के होमियों गांव के जंगल में एक बाघ और बाघीन ने डेरा जमा लिया है, ये दोनों जोड़े या तो बेताल टाइगर प्रोजेक्ट से आये है या फिर छत्तीसगढ़ टाइगर प्रोजेक्ट एरिया से आये है, क्योंकि दोनों जंगल से मिला हुआ इलाका है. इसलिए लोग सावधान रहें.

    पढ़ें ग्रमीणों का क्या कहना है

    वहीं ग्रामीणों ने बताया कि बाघ लगातार गांव के पालतू पशुओं को अपना शिकार बना रहा है. हमलोग वन विभाग के साथ जंगल में आये है, दो दो बाघ के पैर का निशान मिला है बाघ के दहशत से लोगो के चेहरे पर डर का माहौल बना हुआ है. ग्रामीणों ने कहा कि डर इतना है कि हमलोग शाम होते ही सीधे घर मे दुबक जाते है रातभर नही सो पा रहे है. तरह तरह की आवाज सुनने को मिलती है. वहीं गढ़वा दक्षिणी वन प्रमंडल के डीएफओ ने भी कहा कि हमलोग फिलहाल माइकिंग के जरिए जागरूक कर रहे है ,लोगो को जंगल मे नहीं जाने की सलाह दे रहे है.


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