उपेक्षा का दंश झेल रहा लापुंग का इकलौता प्राकृतिक धरोहर प्रसिद्ध बाबा वनखंडी धाम, ग्रामीणों ने उठाया बीड़ा

    उपेक्षा का दंश झेल रहा लापुंग का इकलौता प्राकृतिक धरोहर प्रसिद्ध बाबा वनखंडी धाम, ग्रामीणों ने उठाया बीड़ा

    रांची (TNP Desk) : राजधानी रांची से करीब 70 किलोमीटर दूर लापुंग प्रखंड क्षेत्र के बोकरन्दा पंचायत अन्तर्गत पबीरा गांव के पहाड़ पर स्थित प्रसिद्ध बाबा वनखंडी धाम उपेक्षा का दंश झेल रहा है. इस प्रसिद्ध मंदिर को कोई देखने वाला नहीं है. ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों से गुहार भी लगाया, इसके बावजूद उपेक्षा और उदासीनता में ही मंदिर रहा. इस मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए किसी ने बीड़ा नहीं उठाया. उसके बाद तंग आकर अन्ततः स्थानीय ग्रामीणों ने खुद सीढ़ी और चबुतरा निर्माण कार्य का बीड़ा उठाया. 

    पबीरा गांव के ग्रामीण जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के बाद बैठक में लिए गए निर्णय के आलोक में सीढ़ी और चबुतरा बनाने को लेकर श्रमदान कर निर्माण कार्य में जुट गए हैं. 

    समुद्र तल से 2026 फीट की ऊंचाई पर गुफा में विराजमान हैं बाबा

    श्रमदान करने वाले ग्रामीणों में बिरंची महतो ने बताया कि बाबा वनखंडी धाम पूरे लापुंग प्रखंड का इकलौता ऐसा धार्मिक एवं प्राकृतिक धरोहर है जो पहाड़ों के ऊपर समुद्र तल से 2026 फीट की ऊंचाई पर गुफा में विराजमान शिवलिंग आस्था और विश्वास का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है. यहां भगवान भोलेनाथ की अति प्राचीन शिवलिंग के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास अद्भुत है. लेकिन दुर्गम होने के कारण हजारों श्रद्धालुओं के आस्था का यह केंद्र सड़क एवं अन्य सुविधाओं के अभाव में वर्षों से उपेक्षित पड़ा है. 

    सांसद और विधायक को कई बार दिया गया ज्ञापन

    इस संबंध में समिति के लोगों ने वर्षों पहले कई बार सांसद और विधायक को लिखकर और ज्ञापन देकर सड़क निर्माण की मांग की है. हर बार सिर्फ आश्वासन और भरोसा दिलाया जाता है कि बहुत जल्द इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा. लेकिन दिन महीने साल गुजरते गए लेकिन न सड़क बना और न विकास की कोई किरण दिखाई दी. इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश और निराशा दिखाई दे रही है. अन्ततः समाजसेवी एवं पबीरा गांव के ग्रामीणों ने श्रमदान कर निर्माण कार्य का बीड़ा उठाया. दर्जनों ग्रामीण इस कार्य में सहयोग कर रहे हैं.


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