भाजपा में विस्फोट: निकाय चुनाव लड़ने की मची होड़ के बीच पार्टी अब क्या करने जा रही! 

    भाजपा में विस्फोट: निकाय चुनाव लड़ने की मची होड़ के बीच पार्टी अब क्या करने जा रही! 

    धनबाद(DHANBAD):  झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ी शिकस्त  मिली थी.  उसके बाद लगा था कि निकाय चुनाव में भाजपा अपनी प्रतिष्ठा फिर से वापस कर पायेगी , लेकिन पार्टी के खुद के निर्णय से ही घमासान मच गया है.  नगर निकाय चुनाव मैं अपनी किस्मत आजमाने वालों में होड़ मची हुई है.  धनबाद हो जमशेदपुर हो, मानगो  हो ,सभी जगह समर्थित उम्मीदवारों के अलावे भाजपा के कई नेता चुनाव मैदान में कूद गए है.  इस वजह से असंतोष बढ़ता जा रहा है.  यह  अलग बात है कि इस डैमेज को कंट्रोल करने की कोशिश की जा रही है.  अगर धनबाद की बात की जाए तो संजीव अग्रवाल को भाजपा ने समर्थित उम्मीदवार घोषित किया है.  

    धनबाद का हाल सबसे अधिक ख़राब ,अब आगे क्या?

    उसके बाद नाराज होकर पूर्व मेयर  शेखर अग्रवाल ने पार्टी छोड़ दी.  पूर्व विधायक संजीव सिंह भी नामांकन कर दिया है.  मानगो  नगर निगम में भी मेयर के लिए पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव की पत्नी कुमकुम श्रीवास्तव ने नामांकन किया है.  यहां भाजपा की ओर से संध्या सिंह को एनडीए समर्थित उम्मीदवार घोषित किया गया है.  सूत्र बताते हैं कि यहां अविनाश सिंह राजा की पत्नी ज्योति सिंह भी मैदान में थी, लेकिन भाजपा ने उन्हें मना लिया है.  लेकिन राजकुमार श्रीवास्तव की पत्नी अभी भी मैदान में हैं और पीछे हटने के मूड में नहीं है.  वैसे पार्टी के अंदर मचे घमासान को देखते हुए भाजपा डैमेज कंट्रोल में जुट गई है.  पार्टी के प्रदेश स्तर के नेता और जिला समिति को विशेष रूप से जिम्मेवारी दी गई है.  हालांकि भाजपा के प्रदेश स्तरीय शीर्ष नेताओं को भरोसा है कि अभी वक्त है.  

    भाजपा को भरोसा-सबकुछ सामान्य हो जाएगा ?

    नामांकन वापस लेने के दिन तक सब कुछ सामान्य हो जाएगा, लेकिन क्या होगा, यह कहना अभी  मुश्किल है.  वैसे बता दे कि  झारखंड में कुल  नौ  निगम है, पिछली बार सात निगम में भाजपा समर्थित उम्मीदवार या बीजेपी से जुड़े प्रत्याशी जीते थे.  मानगो  निगम का चुनाव नहीं हुआ था, जबकि चास  और देवघर में निर्दलीय उम्मीदवार विजई रहे थे.  अब भाजपा के लिए अपने इस रिकार्ड को कम से कम मेंटेन करने की बड़ी चुनौती है.  देखना दिलचस्प होगा कि आगे पार्टी का एक्शन क्या होता है? कितने उम्मीदवारों को वह मना पाती है और कितने मैदान में ठहरते हैं.  इतना तो तय है कि भाजपा ने जहां-जहां अपने समर्थित उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, वहां बदलाव की कोई संभावना दिख नहीं रही है. फिर तो चुनाव में भाजपा को "भाजपा" से ही लड़ना  होगा।

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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