ECL: कंपनी के मुगमा एरिया में एकसाथ क्यों पहुंची दो एजेंसी, फिर आगे क्या हुआ, पढ़िए इस रिपोर्ट में

धनबाद(DHANBAD): कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया की अनुषंगी इकाइयों में नए तरह के भ्रष्टाचार का पता चला है. यह भ्रष्टाचार काफी बारीकी से और आपसी सांठगांठ से किया जाता है. प्रत्यक्ष रूप से तो बहुत बड़ी गड़बड़ी नजर नहीं आती, लेकिन इसके पीछे मुट्ठी गर्म करने का बड़ा खेल होता है. जिसके तार नीचे से लेकर ऊपर तक जुड़े होते है. दरअसल, कोलियारियों में अब अंडरग्राउंड में काम करने कोई नहीं जाना चाहता. सब कोई सरफेस में काम करना चाहते है. विशेष कर अनुकंपा के आधार पर जो नौकरियां मिलती हैं, इनमें से बहुतों को अंडरग्राउंड में काम करने की जिम्मेदारी दी जाती है. लेकिन लोकल मैनेजमेंट के छोटे-बड़े अधिकारियों से साठगांठ कर सरफेस पर काम करते है.
एक जाँच को तो दूसरी ट्रैपिंग को पहुंची एजेंसी
सूचना के मुताबिक सोमवार को ईसीएल के मुगमा एरिया में इसी की जांच करने के लिए कोल इंडिया की विजिलेंस अधिकारियों की टीम भी पहुंची थी. तब तक ट्रैपिंग केस को लेकर सीबीआई की टीम भी पहुंच गई. जिस वजह से भारी अफरा तफरी मच गई. दरअसल, ईसीएल की विजिलेंस टीम को निरसा की खुदिया कोलियरी में अंडरग्राउंड की जगह सरफेस में काम कराने की शिकायत मिली थी. शिकायत पर ईसीएल मुख्यालय की विजिलेंस टीम सोमवार को खुदिया कोलियरी में छापेमारी करने पहुंची थी. विजिलेंस टीम ने अंडरग्राउंड से सरफेस में काम करने वाले लोगों को चिन्हित किया. इसी दौरान अंडरग्राउंड में जनरल मजदूर को सरफेस में डाक डिस्पैच में काम करते पकड़ा गया. साथ ही अंडरग्राउंड के एक और मजदूर को सरफेस में कार्मिक विभाग में काम करते पकड़ा गया.
अंडरग्राउंड वाले सरफेस पर काम करते पकड़े गए
विजिलेंस की टीम अंडरग्राउंड से सरफेस पर कैसे काम कराया जा रहा था, इसके कागजात को खंगाल रही थी. इसी बीच सीबीआई की टीम भी पहुंच गई. कहा तो यही जाता है कि अंडरग्राउंड से सरफेस में काम कराने के लिए मैनेजमेंट, मजदूर संगठन का बड़ा गठजोड़ है. उसके आवाज में काम करने वालो को मुट्ठी गर्म करनी पड़ती है. सूत्र बताते हैं कि यह कोई एक कोलियरी का हाल नहीं है. प्राय हर कोलिरियों में ऐसा ही होता है. इधर, सीबीआई की टीम ने ईसीएल मुगमा की खुदिया कोलियरी में दबिश दे दी. टीम ने पीएफ ऑफिस में कार्यरत क्लर्क अरविंद कुमार राय और उनके अधीन काम करने वाले शीतल बाउरी को ₹15000 रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया. कार्मिक विभाग के कर्मचारी शंकर चौहान एवं अजय कुमार मंडल से भी सीबीआई की टीम में पूछताछ की. सीबीआई टीम ने अरविंद कुमार राय एवं शीतल बाउरी को गिरफ्तार कर लिया.
इलेक्ट्रिक विभाग में कार्यरत उमेश प्रसाद सिंह ने की थी शिकायत
दरअसल, खुदिया कोलियरी में इलेक्ट्रिक विभाग में कार्यरत उमेश प्रसाद सिंह की सोमवार को कार्यकाल का अंतिम दिन था. उनका फेयरवेल भी होने वाला था. नियम के अनुसार रिटायरमेंट के बाद पी एफ और ग्रेच्युटी की रकम निकालने संबंधी फाइल अग्रसारित करने के लिए कार्मिक विभाग के कर्मी अरविंद कुमार राय ने ₹15000 की मांग की थी. बातचीत होने के बाद सोमवार को ही राशि का भुगतान करना था. इसके पहले उमेश सिंह ने सीबीआई से संपर्क किया और पूरी बात बताई. सीबीआई ने पूरे मामले की जांच पड़ताल कराई और मामला सही पाए जाने के बाद सोमवार को ट्रैपिंग की योजना बनाई गई. बातचीत के आधार पर अरविंद राय को उमेश सिंह ने फोन किया. कार्मिक विभाग में कार्यरत पीएफ क्लर्क अरविंद कुमार राय ने कहा कि रकम शीतल बावरी को दे दे. राशि उन्हें मिल जाएगी. उमेश सिंह ने 15000 का भुगतान शीतल बाउरी को कर दिया. शीतल बाउरी पैसा लेकर अरविंद राय को देने जैसे ही पहुंचा, तो वहां मौजूद सीबीआई अधिकारियों ने दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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