दुमका: आग लगी या लगायी गयी! जल कर राख हुई जीवन रक्षक दवाईयां

    दुमका: आग लगी या लगायी गयी! जल कर राख हुई जीवन रक्षक दवाईयां

    दुमका(DUMKA): दुमका जिला के जरमुंडी प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पुराने भवन में आग लग गयी. सुबह लोगों ने आग की लपटें देख इसकी सूचना थाना को दी. सूचना मिलते ही जरमुंडी थाना की पुलिस और दुमका से दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुचीं. कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया लेकिन तब तक जीवन रक्षक दवाईयां और कागजात जल कर राख हो गयी।

    आग लगी या लगायी गयी!
     
    जरमुंडी में इस घटना को लेकर हर जुवां पर बस एक ही चर्चा है कि आग लगी या लगायी गयी! यह चर्चा इसलिए है क्योंकि आग एक कमरे में नहीं बल्कि अलग अलग दो कमरों में लगी है और उसी कमरे में लगी है जहाँ जीवन रक्षक दवाईयां और फ़ाइल रखी हुई थी. वैसे अस्पताल प्रबंधन इसे असामाजिक तत्वों की करतूत करार दे रही है लेकिन स्थानीय लोग इसे मानने के लिए तैयार नहीं है. सामाजिक कार्यकर्ता निरंजन मंडल और केशव कुमार का कहना है कि अगर असामाजिक तत्वों द्वारा आग लगाई जाती तो किसी एक जगह आग लगती और वहां से आग अन्य जगह फैलती. लेकिन अलग अलग कमरे में जहाँ दवाई और फ़ाइल रखी हुई है उसमें आग लगना शक पैदा करती है।

    क्या कहते हैं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी

    इस बाबत पूछे जाने पर जरमुंडी प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा प्रभारी डॉ रमेश कुमार ने कहा कि किसी असामाजिक तत्वों द्वारा घटना को अंजाम दिया गया है. उन्होंने बताया कि कमरे में कोरोना से संबंधित दवाईयां और ऑक्सीजन सिलेंडर रखी हुई थी. उन्होंने कहा कि सेनीटाइज़र जैसे ज्वलनशील पदार्थ रहने के कारण इसे अस्पताल के नए भवन के बजाय पुराने भवन में रखा गया था. डॉ साहेब भले ही कहें कि कोरोना से संबंधित दवाईयां थी लेकिन जो दवाईयां जली है उसमें दैनिक उपयोग में आने वाली कई दवाई थी. अधिकांश दवाईयां वर्ष 2021 में ही एक्सपायर कर चुकी है. 

    सवाल उठना लाजमी है कि सरकार के स्तर से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए दवाई की खरीद की जाती है और उसे जरूरत के हिसाब से स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुचाया जाता है. जिसे मरीजों के बीच वितरण किया जाता है. लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब भी कोई मरीज स्वास्थ्य केंद्र आते है तो डॉक्टर जो दवाई लिखते है उसमें से कुछ दवाई ही अस्पताल से दिया जाता है बांकी दवाई बाजार से खरीदनी पड़ती है. परिणाम यह होता है कि दवाई रखे रखे एक्सपायर कर जाती है और साक्ष्य मिटाने के लिए भंडार गृह में आग लगा दी जाती है. जानकर बताते है कि दवाई की खरीद में भी कमीशन का खेल होता है. जरूरत से ज्यादा दवाई स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुचाया जाता है. 

    जब नए भवन में अस्पताल तो भंडार पुराने भवन में क्यों

    एक वर्ष पूर्व ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जरमुंडी अपने नए भवन में शिफ्ट कर गया तो दवाई पुराने भवन में ही क्यों रखा राह गया. इस सवाल के जबाब में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी का कहना है कि कोरोना से संबंधित कुछ दवाईयां जिसमे सेनीटाइज़र और ऑक्सीजन सिलेंडर भी शामिल है, काफी ज्वलनशील होती है. इसलिए इसे अलग रखा गया था. लेकिन सवाल है कि जब डॉक्टर भी यह मानते है कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से इसे अलग रखा गया था तो फिर उसकी सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई थी. जब अस्पताल नए भवन में शिफ्ट हो गया तो स्वाभाविक है परित्यक्त पड़े इस भवन में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगेगा ही यह क्यों नहीं सोचा गया. वैसे हम बता दें कि सीएचसी नए भवन में शिफ्ट होने के बाद पुराने भवन में अटल क्लीनिक खोला गया है जहाँ दिन में स्वास्थ्य कर्मी सेवा देते हैं.

    सवाल कई है. जरूरत है आगलगी की इस घटना की सही तरीके से जांच की. अगर सही जांच हो तो एक बड़ा मामला उगाजर हो सकता है. अब देखना है कि स्वास्थ्य विभाग और प्रसासन इस घटना को कितनी गंभीरता से लेती है. 

    रिपोर्ट: पंचम झा 


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