मुखबिरी की मिली खौफनाक सजा, माओवादियों ने हत्या कर शव सड़क में फेंका

    मुखबिरी की मिली खौफनाक सजा, माओवादियों ने हत्या कर शव सड़क में फेंका

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK):-झारखंड में नक्सलियों का नेटवर्क दरकता जा रहा है, इसके चलते उसकी बौखलाहट भी समय-समय पर देखने को मिलती रहती है. ऐसा ही कुछ पश्चिमी सिंहभूम में देखने को मिला. माओवादियों ने पुलिस के मुखबिरी की सजा एक ड्राइवर को मौत के घाट उतारकर दिया. इस खौफनाक वारदात से इलाके में दहशत का माहौल है.

    उप मुखिया के बड़े भाई की हत्या

    भाकपा माओवादियों ने कदमडीह पंचायत के उप मुखिया डोरसोना सुरीन के बड़े भाई 43 वर्षीय रांदो सुरीन की हत्या शनिवार की रात कर दी. धारदार हथियार से उसकी हत्या करके उसके शव को गितिलपी के बीच सड़क पर फेंक दिया. इस हत्याकांड के बाद इलाके में काफी सनसनी मच गई. ग्रामीणों में इसे लेकर डर का माहौल पैदा हो गया है . रांदो सुरीन वनग्राम लोवाबेड़ा के निवासी थे.

    माओवादियों कहा- मुखबिरी की मिली सजा

    जानकारी के मुताबिक, शनिवार देर शाम 8 बजे भारी संख्या में आए माओवादियों ने गितिलपी चौक के मुख्य सड़क के बीचोबीच धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी. इसके बाद एक हाथ से लिखा पोस्टर भी चस्पा करके जंगल की ओर चले गये. जिसमे लिखा गया था कि मुखबिरी की चलते रांदो सुरीन को मौत की साज दी गई. इससे पहले काफी समझाया बुझाया गया था. लेकिन, इसके बाद भी काफी सक्रिए होकर पुलिस की मुखबिरी करने लगा था. जिसके बाद उसे मौत की सजा दी गई.

    सीआरपीएफ की कार्यप्रणाली पर सवाल

    गितिलीपी चौक पर पहले भी माओवादियों ने कई वारदातों को अंजाम दिया है . यहां चौकाने वाली बात ये है कि यह इलाका सीआऱपीएफ कैंप  से घिरा हुआ है. इसके बावजूद नक्सली बैखौफ अपने काम को अंजाम देने से हिचक नहीं रहें हैं. देखा जाए तो गितिलपी चौक से पश्चिम दिशा में लगभग तीन-चार किलोमीटर दूरी पर सीआरपीएफ का 60 बटालियन कैम्प है. पूरब की ओर 10 किलोमीटर सायतवा में भी सीआरपीएफ का 60 बटालियन कैम्प है. इतना ही नहीं, दक्षिण दिशा में लगभग चार-पांच किलोमीटर दूरी पर हाथीबुरु में भी सीआरपीएफ 60 बटालियन का कैम्प है. गितिलपी गांव को अगर देखा जाए तो सुरक्षा के दृष्टि से सीआरपीएफ कैम्प से गिरा हुआ है। इतना सुरक्षा होने के बावजूद नक्सलियों का इस तरह घटनाओं को अंजाम देना कही न कही सीआरपीएफ की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है. ऐसे में आम इंसान यही समझता है कि इस इलाके में सीआरपीएफ कैंप औऱ पुलिस प्रशासन का होना या न होना बराबर है.


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