DHANBAD : बोरे में बंद चोटिल हालत में मिले इस तीन साल के बच्चे की किस्मत ने पढ़िए कैसे ली करवट, कुछ ऐसे मिली ममता की छांव

    DHANBAD : बोरे में बंद चोटिल हालत में मिले इस तीन साल के बच्चे की किस्मत ने पढ़िए कैसे ली करवट, कुछ ऐसे मिली ममता की छांव

    धनबाद (DHANBAD): दुनिया में बहुत से ऐसे बच्चे हैं, जो इतने किस्मत वाले नहीं होते कि पैदा होते ही उन्हें माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी की छाव नसीब हो. अनाथालय ही इन बच्चों का घर होता है. लेकिन दुनिया में ऐसे लोगों की भी तादाद कम नहीं है, जिन्हें औलाद का सुख नहीं मिल पाता. एक पूरी फैमिली के लिए ये दोनों ही एक-दूसरे के लिए उम्मीद की किरण होते हैं. यानी माता-पिता को संतान मिल जाए और जो अनाथ हैं उन्हें माता-पिता का साया. इसी बुनियादी ज़रूरत की वजह से तय होती है बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया.

    जख्मी हालत में धनबाद स्टेशन में मिला था बच्चा

    कुछ ऐसा ही धनबाद में देखने को मिला है. दरअसल धनबाद में मां-बाप से बिछड़े और राक्षसी प्रवृत्ति का शिकार बने उस 3 साल के बच्चे को क्या मालूम था कि उसकी यही बदकिस्मती एक दिन उसे मुकद्दर का सिकंदर बना देगी .धनबाद के SNMMCH में जब उसका इलाज चल रहा था,तब वह कुछ भी बताने की हालत में नहीं था.  अस्पताल कर्मियों और सीडब्ल्यूसी के लोगों ने उसका नाम सिकंदर रख दिया. उन्हें भी नहीं मालूम था कि जिसका नाम वह लोग सिकंदर रख रहे हैं,वह एक दिन मुकद्दर का सिकंदर बन जाएगा. यह सिकंदर सचमुच आज मुकद्दर का सिकंदर बन गया है .केरल के एक शिक्षक परिवार ने बच्चे को गोद ले लिया है. बता दें कि धनबाद का यह बहुत ही चर्चित और क्रुएल मामला था. जुलाई 2023 में वह धनबाद स्टेशन परिसर में जख्मी हालत में मिला था. उसकी हालत उस समय  ठीक नहीं थी .वह ना कुछ बोल पा रहा था ना कुछ बता पा रहा था. उसके शरीर के कई अंग टूटे हुए थे. चेहरे पर शीशे से वार किया गया था. धनबाद के SNMMCH में उसका लंबा इलाज चला. सीडब्ल्यूसी की पहल पर बच्चों को सराय ढेला स्थित विशेष दत्तक ग्रहण संस्था में रखा गया.यहां रखकर उसके परिजनों की तलाश कराई गई. लेकिन कोई सफलता हाथ नहीं लगी. इधर जनवरी महीने में सीडब्ल्यूसी ने बच्चों को लीगली फ्री घोषित कर दिया था.इसकी पुष्टि सीडब्ल्यूसी के चेयर पर्सन उत्तम मुखर्जी ने भी की है.चुकी यह मामला काफी चर्चित हुआ था. धनबाद के वरीय कांग्रेस नेता और झारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह भी अस्पताल जाकर बच्चे की देखभाल करने वालो को आर्थिक मदद की थी. बच्चे को कहां से उठा कर लाया गया था, क्यों उसके साथ इस तरह व्यवहार किया गया था, इसका खुलासा आज तक नहीं हुआ है. लेकिन अब उसकी किस्मत उसके पक्ष में काम करना शुरू कर दिया है. वह केरल में रहेगा. उसे ममता की छांव मिलेगी. पढ़ाई लिखाई करेगा समाज के मुख्य धारा से जुड़ेगा.

    रिपोर्ट. धनबाद ब्यूरो


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