DHANBAD: कोकिंग कोल वाली बंद खदानें कोयला तस्करों के निशाने पर, ताबड़तोड़ छापे से हो रहे खुलासे


धनबाद(DHANBAD): खनन प्रहरी ऐप पर अवैध उत्खनन और कोयला चोरी की अधिक शिकायतें झारखंड और पश्चिम बंगाल से होती है. धनबाद कोयलांचल तो अवैध उत्खनन में इतिहास बनाने की ओर बढ़ चला है. पिछले दो तीन दिनों से चल रहे अभियान को मिली सफलता भी इसके प्रमाण है. सूत्र बताते हैं कि लगभग 90% शिकायतें झारखंड और पश्चिम बंगाल राज्यों से होती है. छत्तीसगढ़ और ओडिसा से अवैध उत्खनन की शिकायतें नहीं के बराबर होती है. धनबाद कोयलांचल में तो हाल के वर्षों में अवैध उत्खनन का इतिहास बन गया है. कोयला तस्करी में लगे लोग अब सरकार और प्रशासन के लिए भी समस्या बन गए है. कोयला चोरी के धंधे से कमाया अकूत धन उनके पास है.
कोयला तस्करों ने बढ़ा ली है अपनी आर्थिक ताकत
बिना पूंजी -पगहा के अवैध उत्खनन से कोयला तस्करी के धंधे में लगे लोग काफी धन इकट्ठा कर लिए है. उनके पास "लक्ष्मी" की ताकत तो हो ही गई है, अब वह अपने आप को बाहुबली भी समझने लगे है. जिला प्रशासन ने दो-तीन दिनों में ताबड़तोड़ कार्रवाई कर 70 के लगभग अवैध कोयला लोड ट्रको को पकड़ा है. कई मुहानों को बंद किया गया है ,लेकिन एक तरफ से मुहाना बंद किया जाता है तो कुछ घंटे बाद ही फिर कोयला चोर मुहाने खोल लेते है. मुहाने खोलने में भी ऐसा लगता है कि जेसीबी मशीन का उपयोग कोयला चोर करते है. क्योंकि मुहाने बंद करने के लिए जेसीबी मशीन से बोल्डर आदि डाले जाते है. बोल्डर के आकर बड़े होते हैं, उन्हें मैन्युअल हटाना संभव नहीं लगता है. प्रशासन की टीम मुहानों को भी लगातार बंद करा रही है.
कोकिंग कोल् के मुहाने पहले खोले जाते हैं
सूत्र बताते हैं कि कोयले के अवैध खनन के लिए जितने भी मुहाने चिन्हित किए गए हैं, उनमें से अधिकतर कोकिंग कोल् वाले है. कोकिंग कोल् की तस्करी ज्यादा होती है. यह कीमती कोयला होता है. कोकिंग कोयले की मांग भी अधिक होती है. लोकल स्तर की बात कौन कहे, बाहर भी कोकिंग कोल् की डिमांड अधिक होती है. लोहे के लघु व मध्यम उद्योगों में कोकिंग कोल का उपयोग होता है. नन कोकिंग कोल के मुकाबले कोकिंग कोल् की कीमत अधिक होती है. इसलिए अधिक मुनाफा कमाने के लिए कोयला तस्कर कोकिंग कोल् वाले बंद खदानों के मुहाने को ही चुनते है. उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में झारखंड के कोकिंग कोल् की मांग अधिक है. इसलिए भी तस्करी अधिक की जाती है. पूरे देश में फिलहाल बंद कोयला खदानों की संख्या सवा सौ के लगभग में है. झारखंड और पश्चिम बंगाल की हिस्सेदारी 60% के आसपास है. झारखंड और बंगाल में कोयला तस्करी का सबसे बड़ा कारण बंद खदानें और कोकिंग कोल है.
खदान बंदी के बाद मुहानों को बंद किया जाता है
परिपाटी के अनुसार खदान बंदी के बाद मुहाने को बंद कर दिया जाता है. इन मुहानो को ओवर बर्डेन से भर दिया जाता है. इसका ही फायदा कोयला तस्कर उठाते है. बंद खदानों से कोयला निकलना इसलिए भी आसान होता है कि कोयले का सीम साफ तौर पर दिखता है और इसके लिए ओवर बर्डेन हटाने की जरूरत नहीं पड़ती है. धनबाद कोयलांचल में संचालित बीसीसीएल और ईसीएल ने तोअंडरग्राउंड माइन्स को लगभग बंद कर दिया है. यही अंडरग्राउंड माइन्स कोयला चोरों के लिए चारागाह बना हुआ है. कहीं-कहीं तो कोयला चोर प्रशासन को भी चुनौती देने की हिम्मत रखते है. अभी वासुदेवपुर में एक मामला सामने आया था, जिसमें कर्मियों ने कहा था कि क्यू आरटी टीम की उपस्थिति में ही वह कोयला काट पाते है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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