चार महीनों में धनबाद -बोकारो ने खोये दो जुझारू नेताओं को,जानिए दोनों में क्या -क्या थी समानताएं


धनबाद(DHANBAD) | धनबाद -बोकारो ने 4 महीने के भीतर दो जुझारू नेताओं को खो दिया है. दिसंबर 2022 में समरेश दादा का निधन हुआ था. उसके बाद झारखंड के शिक्षा मंत्री टाइगर जगरनाथ महतो को बोकारो ने खो दिया. बोकारो- धनबाद समरेश दादा के निधन से उबर भी नहीं पाया था कि टाइगर जगरनाथ महतो को बीमारी ने छीन लिया. दोनों नेताओं की यह विशेषता थी कि दोनों संघर्ष से उपजे हुए नेता थे. समरेश सिंह का तो उत्तरी छोटानागपुर में भाजपा के उत्थान में भी भूमिका रही है. जनसंघ के जमाने से जुड़े हुए थे.
लगभग चार दशक तक धनबाद -बोकारो के राजनीतिक चेहरा रहे समरेश दादा
विधायक रहे, राज्य के कबीना मंत्री बने, लगभग 4 दशक तक बोकारो -धनबाद के राजनीतिक चेहरा रहे. इधर, टाइगर जगरनाथ झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. टाइगर जगरनाथ महतो बेरमो कोयलांचल में कोयला मजदूर एवं विस्थापितों की लड़ाई लड़ते थे, तो समरेश सिंह बोकारो के कामकार , विस्थापित एवं कोयलांचल के कोयला श्रमिकों के अधिकार के लिए संघर्ष करते रहे. लोग बताते हैं कि समरेश सिंह और जगरनाथ महतो दोनों ने ही गिरिडीह से सांसद बनने का प्रयास किए, लेकिन दोनों को ही सफलता हाथ नहीं लगी. विशेषता का आलम यह था कि दोनों की भाषण शैली काफी जोशीली थी. जबकि आम जनता के बीच उनकी भाषा काफी मधुर और मिलनसार होती थी. वैसे समरेश दादा धनबाद और बोकारो को अपना राजनीतिक कार्यक्षेत्र बनाया था, जबकि जगरनाथ महतो बेरमो कोयलांचल में सक्रिय रहे.
जगरनाथ महतो की शव यात्रा में उमड़ी थी भारी भीड़
उनकी उनकी शव यात्रा में उमड़ी भीड़ ने साबित किया कि लोगों के दिल में उनके प्रति काफी जगह थी. अब देखना होगा कि उनके राजनीतिक विरासत को आगे कौन और कैसे संभालता है. टाइगर जगरनाथ महतो तो बिनोद बिहारी महतो, टेकलाल महतो, शिवा महतो जैसे कद्दावर नेताओं के विरासत को आगे बढ़ाया लेकिन काल ने बीच में ही छीन लिया. वैसे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उनकी पत्नी से मिले हैं और उन्हें भरोसा दिलाया है कि हर समय, हर पल वह परिवार के साथ खड़े दिखेंगे. देखना होगा कि डुमरी विधानसभा सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा किस दांव लगाता है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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