धनबाद: बेसमेंट का पैसा पहुंच गया बिल्डरो की जेब में, खामियाजा भुगत रहा शहर, जानिए कैसे

    धनबाद: बेसमेंट का पैसा पहुंच गया बिल्डरो की जेब में, खामियाजा भुगत रहा शहर, जानिए कैसे

    धनबाद(DHANBAD) : सड़क के किनारे वाहन, बीच सड़क पर आवारा पशुओं का राज, छोटे-बड़े सभी मॉल के बाहर वाहनों की लंबी-लंबी कतार, यही हो गई है धनबाद शहर की पहचान. सड़क सुरक्षा समिति की बैठक निर्धारित समय पर होती जरूर है लेकिन उस बैठक के निर्णय अथवा सुझाव पर अमल नहीं के बराबर होता है. धनबाद शहर में मॉल की भरमार है. बनाने वाले बिल्डरों ने नियम की ऐसी तैसी कर रख दी है. अधिक से अधिक लाभ कमाने के लिए बेसमेंट तक बेच दिया गया है. कहीं-कहीं तो बेसमेंट का इंतजाम भी नहीं है. अब बात उठ रही है कि मॉल के बेसमेंट की दुकानों को हटाकर वहां पार्टी के लिए दबाव बनाया जाये. ताकि शहर को जाम से कुछ राहत मिल सके. 

    पहले भी हो हल्ला होता रहा है  

    इस बात को लेकर पहले भी हो-हल्ला होता रहा है. लेकिन मॉल के बेसमेंट में दुकाने कल भी चल रही थी और आज भी चल रही हैं. आवारा पशुओं की बात करें तो शहर की व्यस्तम सड़कें, भीड़-भाड़ वाले बाजार में भी आवारा पशुओं का बोलबाला होता है. यह पशु अब जानलेवा हो गए है. किसी भी राहगीर को पटक देना, इनके लिए बहुत आसान काम है. आवारा पशुओं को नियंत्रित करने के लिए खूब हंगामा मचता है. दो-चार दिन मीडिया में बातें छाई रहती हैं. फिर सब व्यवस्था पुराने ढर्रे पर चलने लगाती है. शहर के मॉलों के बाहर तो आधी सड़क पर वाहनों का कब्जा होता है. 

    छोटे-छोटे बाजारों में भी बने हुए हैं मॉल

    छोटे-छोटे बाजारों में भी मॉल बने हुए हैं. वहां की स्थिति तो और भी खराब दिखती है. शहर में पार्किंग की कोई कारगर व्यवस्था नहीं बन पाई है. घोषणाएं तो खूब होती है लेकिन पार्किंग का मामला फाइलों से आगे नहीं बढ़ पाता, सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हीरापुर इलाके के लिए सुझाव आया कि पार्क मार्केट में बने कचरा निस्तारण प्लांट को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए और वहां मल्टी स्टोरीड पार्किंग की व्यवस्था की जाए. लेकिन यह तो सिर्फ सुझाव है. इस पर अमल कौन करेगा, कार्रवाई कब होगी? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा.  लेकिन अगर जमीन पर काम नहीं हुए तो धनबाद शहर के लोग अभी 15 मिनट की यात्रा आधे घंटे में कर रहे हैं.  कुछ समय बाद घंटे भर में भी अपने गंतव्य तक पहुंच पाएंगे कि नहीं, इसमें संदेह है.

    रिपोर्ट: शांभवी सिंह, धनबाद  


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