Delhi assembly Election:   झामुमो आप पार्टी के साथ रहेगा या कांग्रेस के साथ जाएगा, पढ़िए क्यों उठ रहे सवाल  

    Delhi assembly Election:   झामुमो आप पार्टी के साथ रहेगा या कांग्रेस के साथ जाएगा, पढ़िए क्यों उठ रहे सवाल  

    धनबाद(DHANBAD): दिल्ली चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा का स्टैंड क्या होगा? झामुमो  के नेता कांग्रेस के पक्ष में प्रचार करेंगे अथवा आप के साथ रहेंगे, यह सवाल बड़ा हो चला है.  राजनीतिक पंडित भी इसे समझ नहीं पा रहे है.  वैसे, झारखंड मुक्ति मोर्चा को अपना स्टैंड क्लियर करना भी बहुत आसान नहीं होगा.  झारखंड विधानसभा चुनाव में इंडिया ब्लॉक पूरी तरह से एकजुट रहा.  लेकिन दिल्ली में एकजुटता  तार -तार हो गई  है.  आप और कांग्रेस एक दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में है.  झारखंड के चुनाव की बात की जाए, तो कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तक इंडिया ब्लॉक के पक्ष में झारखंड में चुनाव प्रचार करने आए थे.  ऐसे में दिल्ली विधानसभा के चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा का स्टैंड क्या होगा, किसके पक्ष में चुनाव प्रचार करेगा.  यह देखने वाली बात होगी.  राजनीतिक पंडित भी इस पर नजर गड़ाए हुए है. 

    झारखंड चुनाव की तरह ही दिल्ली विधानसभा चुनाव भी महत्वपूर्ण हो गया है

     वैसे भी झारखंड चुनाव की तरह ही दिल्ली विधानसभा चुनाव भी महत्वपूर्ण हो गया है. इन सब के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा को दिल्ली के चुनाव में कोई न कोई स्टैंड तो लेना ही पड़ेगा.  यह  अलग बात है कि स्टैंड लेना बहुत आसान नहीं होगा.  कोई बीच का रास्ता झारखंड मुक्ति मोर्चा को खोजना पड़ सकता है.  बता दे कि झारखंड विधानसभा में इंडिया ब्लॉक का प्रदर्शन बेहतर रहा.  गठबंधन को 56 सीट मिली.  इसके साथ ही झारखंड में एनडीए का सफाया हो गया.  हेमंत सरकार ने बड़ी चतुराई से चुनाव का एजेंडा तैयार किया था. उसका प्रतिफल भी सामने आया और गठबंधन को प्रचंड बहुमत हाथ लगा.  यह बात भी सच है कि झारखंड के अजेंडे  की तरह ही दिल्ली के चुनाव में एजेंडा सेट किया जा रहा है.  दिल्ली में भी कांग्रेस ने झारखंड की मंईयां  सम्मान योजना की तरह₹2500 देने की घोषणा कर दी है. 

    बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी कुछ इसी तरह की घोषणा की है.

     बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी कुछ इसी तरह की घोषणा की है.  भाजपा अपने नारे ‘परिवर्तन’ और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) के खिलाफ  अभियान पर ध्यान केंद्रित कर 26 साल से अधिक समय बाद दिल्ली में सत्ता में आने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रही है. भाजपा दिल्ली में आखिरी बार दो दिसंबर 1993 और तीन दिसंबर, 1998 के बीच सत्ता में थी.  तीन मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना, साहिब सिंह वर्मा और सुषमा स्वराज इस दौरान रहे.  दिल्ली की सभी 70 विधानसभा सीटों के लिए मतदान पांच फरवरी को होगा और मतों की गिनती आठ फरवरी को की जानी है. दिल्ली विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप), विपक्षी भाजपा और कांग्रेस के बीच एक रोमांचक त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  


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