सरकार पर संकट : झारखंड में एकबार फिर से ED की एंट्री, शराब घोटाले के रास्ते IAS विनय चौबे, CA नरेश केजरीवाल फिर सरकार तक पहुंचेगी जांच की आंच !

    सरकार पर संकट : झारखंड में एकबार फिर से ED की एंट्री, शराब घोटाले के रास्ते IAS विनय चौबे, CA नरेश केजरीवाल फिर सरकार तक पहुंचेगी जांच की आंच !

    टीएपपी डेस्क (TNP DESK) : झारखंड में एक बार फिर शराब व जमीन घोटाले को लेकर ईडी की एंट्री हो चुकी है. ED ने ACB की FIR के आधार पर इस घोटाले को लेकर ECIR फाइल की है. जिसके बात आशंका जताई जा रही है कि ED के आने से मामले में नया मोड़ आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है. जांच में ED के शामिल होने से पता चलता है कि मामला अब सिर्फ़ शराब पॉलिसी या टेंडर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें फ़ाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन, इन्वेस्टमेंट, धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग भी शामिल हो गई है. इसलिए सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठना तय है. IAS विनय चौबे से लेकर CA नरेश केजरीवाल तक जांच की आंच पहुंच चुकी है. ये कहना गलत नहीं होगा कि जांच की आंच सरकार तक जल्द पहुंच सकती है. गौरतलब है कि ED ने शुरू में PE फाइल किया और फिर शुरुआती जांच की. शुरुआती जांच पूरी करने के बाद ACB ने मई में FIR फाइल की और आगे की जांच शुरू की.

    शराब घोटाला मई 2022 में राज्य की एक्साइज पॉलिसी लागू होने के दौरान हुआ था. उस समय, विनय कुमार चौबे एक्साइज और प्रोहिबिशन डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी थे. साथ ही झारखंड स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के कमिश्नर और मैनेजिंग डायरेक्टर भी थे. दूसरे आरोपी गजेंद्र सिंह उस समय एक्साइज के जॉइंट कमिश्नर थे. दोनों आरोपियों पर अपने पद का गलत इस्तेमाल करने और प्लेसमेंट एजेंसियों के चुनाव के लिए तय प्रोसेस और नियमों का ठीक से पालन किए बिना झारखंड सरकार को गुमराह करने की साज़िश रचने का आरोप है.

    ACB की जांच में पाया गया कि दोनों लोगों ने धोखाधड़ी करके झारखंड सरकार को ₹38 करोड़ का नुकसान पहुंचाया. ED ने PMLA के तहत केस दर्ज करके कोर्ट को इसकी जानकारी दी है. इससे झारखंड सरकार को लगभग ₹38 करोड़ का नुकसान हुआ. इसके बाद, ACB ने कैबिनेट सेक्रेटेरिएट और विजिलेंस डिपार्टमेंट से परमिशन लेकर 20 मई 2025 को ACB रांची पुलिस स्टेशन केस नंबर 09/2025 में FIR दर्ज की.

    मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी से अनुमति के बाद एसीबी ने दर्ज की थी प्राथमिकी

    राज्य में शराब घोटाला मामले में एसीबी झारखंड ने प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज की थी. पीई में एसीबी को यह सबूत मिले कि उत्पाद विभाग में नियमों को ताक पर रखकर प्लेसमेंट एजेंसियों का चयन हुआ और उन्हें अनैतिक लाभ पहुंचाया गया

    10 से अधिक लोगों को बनाया गया है अभियुक्त

    तत्कालीन उत्पाद सचिव और आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे, उत्पाद विभाग के संयुक्त सचिव गजेंद्र सिंह और विनय सिंह समेत अब तक 10 से अधिक लोगों को अभियुक्त बना चुका है. शराब घोटाले में गिरफ्तार किए गए विनय कुमार चौबे सहित कई अन्य आरोपी अभी भी जेल में बंद हैं.


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